एक रेलवे स्टेशन ऐसा भी, 27 साल से नहीं कटा एक भी टिकट; सिर्फ 15 दिन उमड़ती है भीड़
Indian Railway: भारतीय रेलवे यात्रियों के लाइफलाइन कही जाती है। सबसे ज्यादा संख्या में यात्री ट्रेन से ही यात्रा करते हैं। लाखों लोगों की यात्रों को रेलवे आसान करता है। हांलाकि, इस सबके लिए यात्रियों को टिकट भी लेने पड़ते हैं और टिकट नहीं होने पर भारी भरकम जुर्माना भी चुकाना पड़ता है।
आज हम बताने जा रहा है एक ऐसे रेलवे स्टेशन के बार में जहां ट्रेन सिर्फ पितृ पक्ष में रुकती है। उस रेलवे स्टेशन पर 27 साल से कोई टिकट भी नहीं कटा है। साल में सिर्फ 15 दिन लोगों की भीड़ उमड़ती है बाकी के 350 दिन सन्नाटा पसरा रहता है।
कहां है ये रेलवे स्टेशन
दरअसल, बिहार के औरंगाबाद जिले में इस स्टेशन का नाम अनुग्रह नारायण रोड घाट स्टेशन है। गौर करने वाली बात ये है कि यह मुख्य अनुग्रह नारायण रोड स्टेशन से अगल है। इस स्टेशन की हालत ये है कि यहां न तो कोई स्टेशन मास्टर बैठता है और ही कोई दूसरा रेल कर्मचारी रहता है। यहां का टिकट काउंटर पिछले ढाई दशक से बंद है लेकिन, हर साल विभाग को यहां ट्रेनें रोकने के लिए लिखित आदेश देना पड़ता है।
क्यों नहीं रुकती है ट्रेन
अब सवाल है कि यहां ट्रेन क्यों नहीं रुकती है। दरअसल इसके पीछे एक बड़ी धार्मिक कारण है। यह स्टेशन पुनपुन नदी के घाट पर बना हुआ है। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान करने का बड़ा महत्व है और इसके लिए पुनपुन घाट को पवित्र माना जाता है। इन 15 दिनों में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पिंडदान के लिए पहुंचते हैं। यात्रियों की इसी भीड़ का ध्यान रखते हुए रेलवे विभाग स्टेशन पर ट्रेन रोकने का आदेश देता है।
बाकी दिन क्यों रहता है सन्नाटा
गौर करने वाली बात ये है कि पितृ पक्ष खत्म होने के बाद इस स्टेशन पर यात्री नहीं दिखते हैं। साल के बाकी दिनों में यहां से ट्रेनें गुजरती हैं लेकिन रुकती नही। चूंकी यहां कोई यात्री नहीं आता, इसलिए रेलवे ने यहां न तो कोई काउंटर चालू रखा है और ना ही किसी कर्मचारी की ड्यूटी लगती है। यही कारण है कि 350 दिन यह स्टेशन पूरी तरह शांत रहता है और पितृ पक्ष का इंतजार करता है।
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