Tech Update: 2026 में बढ़ सकती है आपकी टेक डिवाइस की कीमत? जानें मोबाइल-कंप्यूटर क्यों हो रहे महंगे
2026 Tech Price Hike: साल 2026 में स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्यूटर जैसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है। इसकी मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग से उत्पन्न मेमोरी चिप्स की वैश्विक कमी है। अंतरराष्ट्रीय डेटा कॉर्पोरेशन (IDC) की रिपोर्ट्स के अनुसार, AI डेटा सेंटर्स की वजह से RAM फ्लैश मेमोरी की कीमतें आसमान छू रही हैं, जो सीधे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स पर असर डाल रही हैं।
AI बनी सबसे बड़ी वजह
AI टेक्नोलॉजी के तेज विकास ने डेटा सेंटर्स की मांग को कई गुना बढ़ा दिया है। कंपनियां जैसे मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल AI मॉडल्स के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और हाई-कैपेसिटी DDR5 की बड़ी मात्रा में खरीद कर रही हैं। इससे मेमोरी मैन्युफैक्चरर्स जैसे सैमसंग, SK हाइनिक्स और माइक्रॉन ने अपना उत्पादन AI की तरफ शिफ्ट कर दिया है, जिससे स्मार्टफोन्स और PCs के लिए इस्तेमाल होने वाली सामान्य DRAM और NAND की सप्लाई कम हो गई है। IDC की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 में DRAM की सप्लाई ग्रोथ सिर्फ 16% और NAND की 17% रहेगी, जो ऐतिहासिक औसत से कम है। RAM की कीमतें अक्टूबर 2025 से दोगुनी हो चुकी हैं, और 2026 की पहली तिमाही में 20-30% और बढ़ोतरी की उम्मीद है।
यह शॉर्टेज सप्लाई-डिमांड असंतुलन से पैदा हुई है। AI सर्वर्स को कंज्यूमर डिवाइसेस से ज्यादा मेमोरी की जरूरत होती है, और मैन्युफैक्चरर्स हाई-मार्जिन AI प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस वजह से स्मार्टफोन्स में इस्तेमाल होने वाली LPDDR5X और PCs में SSDs की उपलब्धता घट रही है। ट्रांसपोर्टेशन और एनर्जी कॉस्ट्स भी बढ़ रहे हैं, जो सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन को और महंगा बना रहे हैं।
बजट स्मार्टफोन्स सबसे ज्यादा प्रभावित
इस समस्या की वजह से स्मार्टफोन्स की एवरेज सेलिंग प्राइस (ASP) 2026 में 2-8% बढ़ सकती है, जिससे बाजार का मूल्य $578.9 बिलियन तक पहुंच सकता है, भले ही शिपमेंट्स में गिरावट आए। IDC के अनुसार, लो-एंड स्मार्टफोन्स में मेमोरी BOM (बिल ऑफ मटेरियल्स) का 15-20% हिस्सा होती है, इसलिए यहां 5-10% प्राइस हाइक देखने को मिल सकती है। भारत जैसे प्राइस-सेंसिटिव मार्केट्स में बजट फोन्स (जैसे ₹10,000-₹20,000 रेंज) सबसे ज्यादा हिट होंगे, जहां मैन्युफैक्चरर्स जैसे Xiaomi, Realme, Oppo और Vivo को या तो स्पेक्स कम करने पड़ेंगे (जैसे 4GB RAM पर वापस जाना) या कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी। प्रीमियम फोन्स जैसे iPhone और Samsung Galaxy में 10-15% BOM प्रभाव होगा, लेकिन ये कंपनियां लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स से कुछ हद तक बच सकती हैं।
PCs और लैपटॉप्स पर पड़ेगा कितना असर?
PCs में मेमोरी अब कुल कॉस्ट का 30-40% हिस्सा बन गई है (पहले 15-20%)। IDC की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 में PC मार्केट 4.9-8.9% सिकुड़ सकता है, जबकि ASP 4-8% बढ़ सकती है। Lenovo, Dell, HP जैसे वेंडर्स ने H2 2026 के लिए 15-20% प्राइस हाइक की चेतावनी दी है। AI PCs (NPU वाले सिस्टम्स) को 16GB+ RAM की जरूरत होती है, लेकिन शॉर्टेज से ये महंगे हो सकते हैं या स्पेक्स कम हो सकते हैं। छोटे वेंडर्स को ज्यादा नुकसान होगा, जबकि बड़े प्लेयर्स मार्केट शेयर बढ़ा सकते हैं। विंडोज 10 के एंड-ऑफ-लाइफ से रिफ्रेश साइकल प्रभावित होगा।
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