रिलीज से पहले कानूनी शिकंजे में फंसी मनोज बाजपेयी की ‘घूसखोर पंडित’, FIR भी दर्ज; जानें क्यों छिड़ा बवाल
Ghooskhor Pandat Controversy: बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी नेटफ्लिक्स फिल्म 'घूसखोर पंडित' (Ghooskhor Pandat) रिलीज से पहले ही विवादों से घिर गई है। दरअसल, फिल्म के टीजर के रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर इसके टाइटल को लेकर विवाद शुरु हो गया। दर्शकों ने इसे जातिवादी और ब्राह्मण समुदाय का अपमान बताया गया। विवाद इतना बढ़ गया कि लखनऊ में फिल्म के मेकर्स के खिलाफ FIR दर्ज हो गई, जबकि दिल्ली हाईकोर्ट में रिलीज पर रोक लगाने की याचिका दायर की गई। इस बीच, इस फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे और एक्टर मनोज बाजपेयी के बयान सामने आए है। उन्होंने कहा है कि फिल्म किसी समुदाय को टारगेट नहीं करती और वे लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हैं।
क्या है फिल्म की कहानी?
बता दें, फिल्म 'घूसखोर पंडित' एक थ्रिलर ड्रामा है, जिसमें मनोज बाजपेयी दिल्ली पुलिस के एक भ्रष्ट अधिकारी अजय दीक्षित की भूमिका निभा रहे हैं, जिनका निकनेम 'पंडत' है। कहानी एक रात की घटनाओं पर आधारित है, जहां अधिकारी एक घायल महिला को ढूंढने के बाद साजिश में फंस जाता है। फिल्म का निर्देशन नीरज पांडे ने किया है, जबकि सह-लेखक रितेश शाह हैं। कास्ट में नुशरत भरुचा, साकिब सलीम, अक्षय ओबेरॉय और दिव्या दत्ता भी शामिल हैं। टीजर 3फरवरी 2026को रिलीज हुआ था, जिसके बाद टाइटल पर बवाल मच गया।
क्यों हो रहा है विवाद?
इस फिल्म के आलोचकों का कहना है कि 'पंडित' शब्द ब्राह्मण समुदाय से जुड़ा सम्मानजनक पद है, जिसे 'घूसखोर' से जोड़कर समुदाय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई गई है। सोशल मीडिया पर #ShameOnNetflix और #BoycottManojBajpayee जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जहां यूजर्स फिल्म को जातिवादी बताते हुए बॉयकॉट की अपील कर रहे हैं।
कानूनी कार्रवाई और विरोध प्रदर्शन
विवाद बढ़ने पर मुंबई के वकील अशुतोष दुबे ने नेटफ्लिक्स और मेकर्स को लीगल नोटिस भेजा, जिसमें टाइटल बदलने और सफाई देने की मांग की गई। इसके अलावा दिल्ली हाईकोर्ट में वकील विनीत जिंदल ने याचिका दायर की, जिसमें फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की अपील की गई है। याचिका में कहा गया कि टाइटल सामाजिक सद्भाव बिगाड़ सकता है और ब्राह्मण समुदाय को बदनाम करता है।
इसके अलावा भोपाल में ऑल इंडिया ब्राह्मण महासभा और मध्य प्रदेश ब्राह्मण समाज ने विरोध प्रदर्शन किए, जिसमें फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म से हटाने और मेकर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि फिल्म ब्राह्मणों को रिश्वतखोर दिखाकर समुदाय का अपमान कर रही है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी है।
मेकर्स और एक्टर की सफाई
वहीं, अब इस विवाद पर फिल्म निर्देशक नीरज पांडे ने आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि वे प्रचार सामग्री को हटा रहे हैं और मामले की जांच चल रही है। मनोज बाजपेयी ने भी बयान जारी करते हुए कहा 'मैं लोगों की भावनाओं और चिंताओं का सम्मान करता हूं और उन्हें गंभीरता से लेता हूं। जब आपकी कोई चीज किसी को ठेस पहुंचाती है, तो रुककर सुनना जरूरी है। मेरा इरादा किसी समुदाय को ठेस पहुंचाना नहीं था, बल्कि एक दोषपूर्ण व्यक्ति के किरदार को चित्रित करना था।' उन्होंने जोर देकर कहा कि फिल्म किसी समुदाय पर कोई बयान नहीं है।
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