Nithari Kand: सुरेंद्र कोली को 19 मामलों में कैसे मिली राहत? जानिए निठारी कांड की पूरी कहानी
Nithari Case: दिल्ली एनसीआर के सबसे कांड निठारी कांड से जुड़े 2 मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरेंद्र कोली और मनिंदर सिंह पंढेर की फांसी की सजा को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने दोनों मामलों में सुरेंद्र कोली और मनिंदर सिंह को निर्दोष करार दिया है। दरअसल, हत्या, अपहरण, दुष्कर्म और सबूतों को मिटाने के लिए सुरेंद्र कोली के खिलाफ पहले 19 मामले दर्ज हुए,फिर घटकर 16 हो गए,16 के बाद घटकर और कम हो गए और फिर 14 रह गए। और अब 14 मामलों में भी राहत मिल गई और जेल से बाहर आने की तैयारी है।
कोर्ट ने सबूतों के अभाव में दोनों को निर्दोष करार दिया है। बता दें, मोनिंदर सिंह पंढेर नोएडा के सेक्टर-3 के निठारी में स्थित डी-5 बंगले का मालिक है और सुरेंद्र कोली उसका नौकर था।सीबीआई ने साल 2005-2006 में नोएडा में हुए निठारी केस में सुरेंद्र कोली को हत्या, अपहरण, बलात्कार और सबूत मिटाने को लेकर आरोपी बनाया था।
मानव तस्करी का बनाया था आरोपी
वहीं, उसके मालिक मनिंदर सिंह पंधेर को मानव तस्करी का भी आरोपी बनाया गया था। दोनों आरोपियों ने दो मामलों में अपनी फांसी की सजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। आरोपियों ने कोर्ट में कहा था कि इन घटनाओं का कोई चश्मदीद मौजूद नहीं है। उन्हें सिर्फ साइंटिफिक और कंडीशिनल सबूतों के आधार पर ये सजा सुनाई गई है। अब जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्र और जस्टिस एस एच ए रिजवी की बेंच ने दोनों केस में आरोपियों को बरी कर दिया।
क्या है निठारी कांड?
7 मई 2006 को निठारी की एक युवती को पंढेर ने नौकरी दिलाने के बहाने बुलाया था। इसके बाद युवती वापस घर नहीं लौटी। युवती के पिता ने नोएडा के सेक्टर 20 थाने में गुमशुदगी का केस दर्ज कराया था। इसके बाद 29 दिसंबर 2006 को निठारी में मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पीछे नाले में पुलिस को 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले थे। पुलिस ने मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया था, बाद में निठारी कांड से संबंधित सभी मामले सीबीआई को ट्रासंफर कर दिए गए थे। सीबीआई की तफतीश में आरोप लगाया गया कि पंढेर की कोठी से गुजरने वाले बच्चों को पकड़ कर उनके साथ कुकर्म करता और फिर उनकी हत्या कर देता। हालांकि, निठारी गांव के लोगों का कहना है कि पंढेर की कोठी से शरीर के अंगों का व्यापार होता था। उनका कहना है कि वे बच्चों को मारकर उनके अंग निकाल लेते थे। उसे विदेशों में बेंचा जाता था।
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