जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ पक्ष-विपक्ष एक साथ, मॉनसून सत्र में उठाने जा रहें बड़ा कदम
Justice Yashwant Varma Impeachment: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद के अगले मॉनसून सत्र में पद से हटानेकी तैयारी चल रही है। सरकार ने यह कदम जस्टिस वर्मा के घर से मार्च 2025 में 15 करोड़ रुपये नकदी बरामद होने के बाद उठाया है। सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच समिति ने उन्हें दोषी ठहराया, लेकिन जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। यह प्रस्ताव लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ पेश किया जाएगा। विपक्षी दलों ने भी इस मामले में सरकार को समर्थन देने का आश्वासन दिया है। मॉनसून सत्र, जो 21 जुलाई से 12 अगस्त तक चलेगा, में यह प्रस्ताव संसद के नए भवन में पहली महाभियोग कार्यवाही बन सकता है।
100 सांसदों ने दिखाया समर्थन
महाभियोग प्रस्ताव के लिए लोकसभा में 100 सांसदों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं, और इस दिशा में सिग्नेचर जुटाने का काम शुरू हो चुका है। सूचना मिली है कि, सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी सांसद भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करेंगे, जिससे इसे व्यापक समर्थन मिलने की उम्मीद है। प्रस्ताव पेश होने के बाद एक जांच समिति गठित की जाएगी, जो जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों की गहन जांच करेगी।
क्या है जस्टिस यशवंत वर्मा पर आरोप ?
जस्टिस यशवंत वर्मा पर मार्च 2025 में उनके आवास से 15 करोड़ रुपये की नकदी बरामद होने का गंभीर आरोप है। सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति ने इस मामले में उनकी संलिप्तता पाई, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई। यदि यह महाभियोग प्रस्ताव संसद में पारित होता है, तो यह न केवल जस्टिस वर्मा के करियर पर असर डालेगा, बल्कि संसद के नए भवन में पहली महाभियोग कार्यवाही के रूप में इतिहास रचेगा। यह मामला न्यायपालिका और सरकार के बीच संबंधों पर भी गहरी चर्चा को जन्म दे सकता है।
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