70 से ज्यादा मौतें...सैंकड़ों बेघर, जानें हिमाचल में आखिर क्यों दरक रहे पहाड़
Himachal Pradesh Disaster: हिमाचल प्रदेश देश का ऐसा राज्य जो सबसे खूबसूरत राज्यों में से एक है जहां गर्मी हो या ठंड हर समय सैलानियों का जामवड़ा लगा रहता है। लेकिन इस वक्त हिमाचल में बारिश ने तबाही मचाई है। हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है। कोई अपने परिवार से बिछड़ गया तो कोई परिवार समेत लैंडस्लाइड और बाढ़ की चपेट में आ गया। हिमाचल में हर तरफ चीखें पुकारें सुनाई दे रही हैं। शिमला से लेकर कुल्लू, कांगड़ा, मंडी और मनाली तक हर जगह यही हाल है।
70 से ज्यादा हो चुकीं मौतें
हिमाचल में 2 महीनों में दर्जनों लैंडस्लाइड, 20 से ज्यादा बादल फटने की आपदा झेल चुका है। इस दौरान 70 से ज्यादा मौत हो चुकी हैं। हिमाचल के लोगों का कहना है कि इस साल से पहले कभी ऐसी आपदा नहीं देखी ।रेस्क्यू ऑपरेशन में वायुसेना के हेलीकॉप्टर से लेकर केंद्र और राज्य की आपदा प्रबंधन एजेंसी के जवान लगे हुए हैं। अब तक करीब तीन हजार लोगों को रेस्क्यू करके हिमाचल के अलग अलग इलाकों से सुरक्षित जगह पहुंचाया जा चुका है। लेकिन सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों पहाड़ दरक रहे हैं इसी साल ऐसी भयंकर त्रासदी क्यों आई है।
इस वजह से आई त्रासदी
विशेषज्ञों का मानना है कि पारिस्थितिक रूप से नाजुक हिमालय में अवैज्ञानिक निर्माण, घटते वन क्षेत्र और पानी के प्रवाह को अवरुद्ध करने वाली नदियों के पास लगातार निर्माण हो रहे हैं, जो कि लगातार भूस्खलन का कारण बन रहे हैं। हिमाचल में केवल 5-10 फीट की रिटेनिंग दीवारों के साथ सड़क निर्माण के लिए पहाड़ों की कटाई की जा रही है। इसके साथ ही तलहटी में चट्टानों के कटने और उचित जल निकासी व्यवस्था की कमी के कारण हिमाचल में भूस्खलन बढ़ रहा है। हिमाचल प्रदेश में जून से सितंबर तक पूरे मानसून सीजन के दौरान औसतन लगभग 730 मिमी बारिश होती है, लेकिन मौसम विभाग के अनुसार इस साल अब तक राज्य में 742 मिमी बारिश हो चुकी है।
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