अरब देशों में भारतीयों की नौकरी पर खतरा? जानें किस सेक्टर में सबसे ज्यादा कामगार
Gulf Crisis Impact: खाड़ी देशों (GCC) में काम करने वाले भारतीयों की संख्या करीब 93लाख के पार पहुंच गई है। इनमें से सबसे ज्यादा भारतीय निर्माण (कंस्ट्रक्शन) क्षेत्र में काम कर रहे हैं। लेकिन मौजूदा पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और संघर्ष के कारण लाखों नौकरियां खतरे में हैं। रेमिटेंस पर भी असर पड़ रहा है, जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सालाना 51अरब डॉलर का बड़ा सहारा है।
विदेश मंत्रालय और हालिया आंकड़ों के मुताबिक, UAE में सबसे ज्यादा (लगभग 40लाख) भारतीय कामगार हैं, उसके बाद सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान और बहरीन। कुल मिलाकर GCC देशों में 65-70प्रतिशत भारतीय नीली कॉलर (ब्लू-कॉलर) श्रमिक हैं, जिनकी मुख्य गतिविधि निर्माण, तेल-गैस, लॉजिस्टिक्स, होटल-सेवा और घरेलू काम है। निर्माण क्षेत्र अकेले में सबसे बड़ा रोजगारदाता है, जहां भारतीय मजदूर स्काईस्क्रेपर, रोड, ब्रिज और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर दिन-रात मेहनत करते हैं।
निर्माण क्षेत्र में सबसे ज्यादा भारतीय क्यों?
1. खाड़ी देशों के तेज विकास और मेगा प्रोजेक्ट्स (NEOM, Expo, World Cup infrastructure आदि) के कारण मजदूरों की भारी मांग।
2. भारतीय कामगार कुशल, मेहनती और सस्ते माने जाते हैं।
3. अन्य क्षेत्रों में भी भारतीय हैं, लेकिन सफेद कॉलर (डॉक्टर, इंजीनियर, IT, फाइनेंस) की संख्या कुल का सिर्फ 30-35प्रतिशत है।
लाखों नौकरियों पर मंडरा रहा संकट
हाल ही में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव (ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष) के कारण स्थिति बिगड़ी है। Human Rights Watch (HRW) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, लाखों भारतीय कामगार अब न सिर्फ सुरक्षा के खतरे में हैं, बल्कि नौकरी छिनने, वेतन में कटौती और घर वापसी के दबाव का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा कई कंपनियां प्रोजेक्ट्स रोक रही हैं या छंटनी कर रही हैं।
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