Artificial Rain: क्या होती है आर्टिफिशियल बारिश? जिसे करवाने की केजरीवाल सरकार बना रही योजना
Artificial Rain: दिल्ली और आसपास के इलाके में प्रदूषण अपना कहर ढा रही है। प्रदूषण के वजह से लोगों को काफी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पिछले कुछ दिन से एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI का स्तर 500 के पार बना हुआ है। प्रदूषण की स्थिति से निपटने के लिए केजरीवाल सरकार आर्टिफिशियल बारिश करवाने की तैयारी में है। लेकिन आखिर ये आर्टिफिशियल बारिश होती क्या है?
दरअसल, ये बारिश कराने की एक ऐसी तकनीक है जिसमें छोटे-छोटे विमानों को बादलों के बीच से गुजारा जाता है। ये विमान बादल में सिल्वर आयोडाइड, ड्राई आइस और क्लोराइड छोड़ते जाते हैं। जिससे बादलों में पानी की बूंदें जम जाती हैं। यही पानी की बूंदें फिर बारिश बनकर जमीन पर गिरती हैं। इस तकनीक को क्लाउड सीडिंग कहते हैं। आमतौर पर क्लाउड सीडिंग के जरिए करवाई गई आर्टिफिशियल बारिश सामान्य बारिश की तुलना में ज्यादा तेज होती है। लेकिन, ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि इस दौरान कितनी मात्रा में केमिकल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।
56 देश करते हैं इस तकनीक का प्रयोग
कुछ जानकार ये कहते हैं कि आर्टिफिशियल बारिश के लिए बादल का होना जरूरी है। बिना बादलों के क्लाउड सीडिंग नहीं की जा सकती है। वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर के 56 देश क्लाउड सीडिंग का प्रयोग कर रहे हैं। चीन की राजधानी बीजिंग की गिनती दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में होती है। ऐसे में प्रदूषण को कम करने और मौसम को साफ बनाए रखने के लिए अक्सर ही बीजिंग में आर्टिफिशियल बारिश करवाई जाती है।
भारत में भी हुआ प्रयोग
भारत में भी आर्टिफिशियल बारिश कई जगहों पर समय समय पर कराई भी गई है। 50 के दशक में महाराष्ट्र और लखनऊ के कुछ हिस्सों में इस तकनीक का प्रयोग कर के आर्टिफिशियल बारिश कराई गई थी। लेकिन प्रदूषण से निपटने के लिए किसी बड़े भूभाग में इसका प्रयोग नहीं हुआ है। ऐसी बारिश होने पर हवा में मिला प्रदूषण पानी के साथ मिलकर जमीन पर आ जाएगा और हवा एकदम साफ हो जाएगी, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत निजात दिला सकती है।
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