ऐसे हुई थी धरती पर सूर्य की उत्पत्ति, पौराणिक कथाओं में छुपा है इसका रहस्य
Sunday Special: रविवार का दिन सूर्यदेव का दिन माना जाता है। आज के दिन भगवान सूर्य की उपासना करने से जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, नवग्रहों में से सूर्य को राजा का पद मिला है। विज्ञान में भी बताया जाता है कि बिना सूर्य के पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है, इसलिए वेदों में इसे जगत की आत्मा भी कहा जाता है। लेकिन क्या आपको पता है सूर्यदेव की उत्पत्ति कैसे हुई?आजहम आपको भगवान सूर्य की उत्पत्ति के बारे में बताएंगे।
सूर्य देव की थी उपासना
पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रह्मा जी के पुत्र मरीचि और मरीचि के पुत्र महर्षि कश्यप का विवाह प्रजापति दक्ष की कन्या दीति और अदिति से हुआ था। अदिति इस बात से दुखी थी कि दैत्य और देवताओं में आपसी लड़ाई होती रहती थी। तब अदिति ने सूर्य देव की उपासना की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने पुत्र के रूप में जन्म लेने का वरदान दिया था। कुछ समय बाद महर्षि कश्यप इस बात से परेशान रहने लगे कि इससे अदिति का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। महर्षि कश्यप ने अदिति को समझाया तब उन्होंने कहा कि संतान को कुछ नहीं होगा, क्योंकि ये स्वयं सूर्य स्वरूप हैं। कुछ समय बाद तेजस्वी बालक ने जन्म लिया, जिन्होंने देवताओं की रक्षा की और असुरों का संहार किया। सूर्य देव को आदित्य भी कहा गया, क्योंकि उन्होंने अदिति के गर्भ से जन्म लिया।
प्रतिदिन करनी चाहिए उपासना
ये भी कहा जाता है कि अदिति ने हिरण्यमय अंड को जन्म दिया था, जिनका नाम मार्तंड पड़ा। इस तरह सूर्य देव की उत्पत्ति हुई थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्यदेव की उपासना करने और जल अर्पित करने से जातकों पर उनकी कृपा बनी रहती है।
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