इस कारण चंद्रयान-3 की लैंडिंग के लिए चुना गया दक्षिणी ध्रुव, ISRO चीफ ने बताई वजह
Chandrayaan 3: बीते दिन भारत ने चांद पर कीर्तिमान रच दिया।इसरो के चंद्रयान-3 सफलतापूर्वक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर साफ्ट लैंडिंगकीहै।चंद्रमा मिशन की सफलता से भारत अमेरिका, चीन और तत्कालीन सोवियत संघ के बाद चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन गया है।इसके साथ ही चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। अब वहीं इसरो के चीफ एस सोमनाथ ने बताया है कि चंद्रयान-3 की लैंडिंग के लिए चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव को ही क्यों चुना गया।
इसरो चीफ ने दी अहम जानकारी
एस. सोमनाथ ने बताया, "हम दक्षिणी ध्रुव के करीब पहुंच गए हैं, जो लगभग 70डिग्री पर है। दक्षिणी ध्रुव पर सूरज की कम रोशनी पहुंचती है। इसका एक विशिष्ट लाभ है। इस हिस्से में और भी अधिक वैज्ञानिक सामग्री होने की संभावना है। चंद्रमा पर काम करने वाले वैज्ञानिकों ने दक्षिणी ध्रुव में बहुत रुचि दिखाई है, क्योंकि यहां मानव जाकर अपना उपनिवेश बनाना चाहते हैं और फिर उससे आगे की यात्रा करना चाहता है। हम जिसकी तलाश कर रहे हैं, उसके दक्षिणी ध्रुव में होने की क्षमता है।"
प्रज्ञान रोवर के पास हैं दो उपकरण
एस सोमनाथ ने प्रज्ञान रोवर और इसकी कार्यप्रणाली के बारे में बात करते हुए कहा,कि प्रज्ञान रोवर के पास दो उपकरण हैं, दोनों चंद्रमा पर मौलिक संरचना के निष्कर्षों के साथ-साथ रसायनिक संरचनाओं से संबं इसके अलावा, यह सतह पर चक्कर लगाएगा। हम एक रोबोटिक पथ नियोजन अभ्यास भी करेंगे जो हमारे लिए भविष्य के अन्वेषणों के लिए महत्वपूर्ण है।
गगनयान और मिशन सूर्य के बारे में दी जानकारी
इसके साथ ही इसरो चीफ ने मिशन सूर्य और गगनयान के बारे में भी बताया। मिशन सूर्य यानी आदित्य एल-1 और गगनयान मिशन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "सूर्य के लिए आदित्य मिशन सितंबर में लॉन्च के लिए तैयार हो रहा है। गगनयान पर अभी भी काम चल रहा है। हम क्रू मॉड्यूल और क्रू एस्केप क्षमता को प्रदर्शित करने के लिए संभवतः सितंबर या अक्टूबर के अंत तक एक मिशन करेंगे, जिसके बाद कई परीक्षण मिशन होंगे जब तक कि हम संभवतः 2025 तक पहला मानव मिशन नहीं कर लेते।"
दुनिया
देश
कार्यक्रम
राजनीति
खेल
मनोरंजन
व्यवसाय
यात्रा
गैजेट
जुर्म
स्पेशल
मूवी मसाला
स्वास्थ्य
शिक्षा
शिकायत निवारण
Most Popular
Leave a Reply