HARYANA NEWS: घंटों लिफ्ट में फसा रहा 8 साल का मासूम बच्चा, फंसने के बावजूद कर दिया बड़ा काम; जानिए
नई दिल्ली: फरीदावाद के दो अलग-अलग डिपार्टमेंट में लिफ्ट बंद होने का केस सामने आया है। दरअसल, फरीदाबाद की दो अलग-अलग रेजिडेंशियल सोसाइटीज में दो दिन के भीतर दो अलग-अलग केस सामने आए हैं। जिसमें बच्चे घंटों तक लिफ्ट में बंद रहे हैं। हलांकि, लिफ्ट में बंद एक बच्चे ने बिना घबराए अपनी सहनशीलता का परिचय देते हुए बताया कि कैसे वे साहस के साथ खुद को बचाया। यहां तक कि ध्यान भटकाने के लिए उसने लिफ्ट में ही होमवर्क भी खत्म कर डाला।
ये मानसा फरीदाबाद के ओमेक्स रेसीडेंसी सोसाइटी का केस है। यहां शनिवार शाम को एक 8साल का मासूमबच्चा करीब 3घंटे तक लिफ्ट में फंसा रहा। खबरों के मुताबिक, बच्चा शाम 5:00बजे ट्यूशन के लिए 5फ्लोर से लिफ्ट से नीचे गया था। वो हमेसा 6:00बजे तक ट्यूशन से वापस घर आ जाता था। लेकिन जब वह शाम 7:00बजे तक भी घर नहीं आया, तो परिजनों ने ट्यूशन में फोन करके उसके बारे में पूछा तब पता चला, कि वह आज ट्यूशन ही नहीं आया था। इसके बाद लोगों से पूछने पर पता चला, कि लिफ्ट शाम 5:00बजे से ही बंद है। परिजनों को आशंका हुई, कि कहीं उनका बेटा लिफ्ट में ही तो नहीं फंस गया है। उसके बाद लिफ्ट प्रबंधक को इसके बारे में जानकारी दी गई। जिसके बाद लिफ्ट को खोला गया। तो देखा कि बच्चा लिफ्ट में ही मौजूद था।
घंटों बंद रही लिफ्ट
परिजनो ने बताया कि किसी ने भी यह जानने की कोशिश नहीं की लिफ्ट के अंदर कोई बंद तो नहीं है। हालांकि, बच्चे का कहना है, कि उसने जोर से आवाज भी लगाई और इमरजेंसी बटन भी दबाया। लेकिन कोई भी मदद के लिए उसे बचाने नहीं आया।
दूसरे मामले में ढाई घंटो तक फसी रही बच्ची
यह केस भी फरीदाबाद के एसआरएस रेजिडेंशियल सोसायटी का ही है। जहां सोसाइटी के C7टावर में फ्लैट नंबर 406में रहने वाले विकास श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी 11साल की बेटी स्नेहा, जो कि छठी कक्षा में पढ़ती है। रविवार शाम को लिफ्ट में घंटो फंसी रही।विकास श्रीवास्तव ने बताया कि इस दौरान किसी भी गार्ड ने यह चेक करने की कोशिश नहीं की,जब लिफ्ट बंद है, तो क्या उसके अंदर कोई फंसा भी हो सकता है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि उनकी समिति लिफ्ट मेंटिनेंस के लिए जॉनसन कंपनी को हर प्रतिवर्ष 24लाख रुपए देती है। उसके बावजूद लिफ्ट हमेशा खराब ही रहती है।
मैनेजमेंट की लापरवाही
2 दिनों में ही फरीदाबाद में दो अलग-अलग सोसाइटी में हुए इस तरह के मामले हमें यह बताती है, कि लिफ्ट मैनेजमेंट स्टाफ किस कदर लापरवाह है। दोनों ही मामलों में अगर ज्यादा देर लिफ्ट बंद रहती तो, यह गंभीर हादसा बन सकता था। ऐसे में जरूरी है, कि लिफ्ट की मेंटेनेंस करने वाली कंपनियां इस मामले को गंभीरता से जांच करेंऔर अपने स्टाफ को जागरूक करें।
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