MP News: गंदा पानी पीकर भी जी रहे इस गांव के लोग, वजह जान हैरत में पड़ जायेंगे आप
अनूपपुर: मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में नर्मदा नदी के किनारे बसे एक गांव की आबादी लगभग 300 करीब है और 150 के लगभग मतदाता है। देश को मिली आजादी के 76 वर्ष बीत जाने के बाद भी गांव वालों ने विकास का मुंह नहीं देखा है।
दरअसल, ग्रामीण मूलभूत सुविधा पाने आज भी तरस रहे है। गांव मे चलने के लिए सड़क नहीं है। आगनबाड़ी दूर होने के चलते छोटे बच्चे आगनबाड़ी नहीं जा पाते। यहां तक कि इस गांव मे 8वीं कक्षा स्कूल के बाद 9वीं 10वीं की। पढ़ाई में भी रास्ता रोड़ा बन कर सामने खड़ा हो जाता है। ऐसे में आगे की पढ़ाई भी रुक जाती है, हर घर तक नल का ढिंढोरा पीटने वाले नुमाइंदों को इस गांव आकर जरूर देखना चाहिए कि नल तो लगा दिया गया। मगर वो शो पीस बना हुआ है।
नदी का पानी पीकर प्यास बुझाते लोग
ग्रामीण झिरिया का पानी या नदी का पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते है। बारिश के दिनों में नदी नाला बाढ़ की चपेट में आ जाता है। तब और भी ज्यादा समस्या खड़ी हो जाती है। यहां से जो तस्वीर सामने आई उसने तो चौका ही दिया। जिस झिरिया से ग्रामीण पीने के लिए पानी भर रहे उसी झिरिया में मवेशी भी पानी पी रहे है ऐसी तस्वीरों को देखकर इनकी परेशानियो को समझा जा सकता है।
इस मामले पर हमने ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक अर्जुन सिंह से जब पूछा कि संगम टोला में पंचायत ने क्या विकास किये। तो उन्होंने कहा कि सिर्फ हितग्राही मूलक काम दिए है। जैसे खेत तलाब हो गया बोल्डर वाल लोग पानी भी नर्मदा के पीतेहै।जनपद पुष्पराजगढ़ के सीईओ के के सोनी ने इस गांव का जल्द निरीक्षण कर प्लान बना कर विकास पहुचाने की बात कही है देखने वाली बात होगी कि आखिर इस गांव में कब तक विकास पहुँच पायेगा।
गांव में नहीं भेजी गई कोई टीम
जल निगम के इंचार्ज से जब पानी सप्लाई न मिल पाने की बात फोन पर पूछी तो उन्होंने कहा कुछ घर ऐसे है जहां पानी नहीं पहुंच रहाहै। टीम भेज कर चेक करवा लेते है आखिर क्यों पानी नहीं जा रहा। अपसोस बात करने के 3 - 4 दिन बाद भी टीम गांव नहीं पहुंची।
ग्रामीणों से हमने दोबारा जब टीम पहुंचने की। बात पूछी तो ग्रामीणों ने सीधा कहा हमारे गांव अब तक कोई नहीं आया। उधर अधिकारी से दोबारा फोन पर सम्पर्क किया। तो टीम पहुंच गई है। साथ ही बोला गया कि जब हमने अधिकारी से ये कहा कि सर लाइन पर ग्रामीण भी है। तो उन्होंने पता करवा लेता हूं। बोलकर फोन ही काट दिया।
सवाल ये उठता है कि ऐसे अधिकारी जो मीडिया से ही झूठ बोलने लगे वो ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान कैसे कर सकते है। इन ग्रामीणों की प्यास कब तक बुझ पाएगी ये आने वाला वक्त ही बताएगा। बहरहाल सड़क और पानी के लिए रोजाना ग्रामीण जद्दोजेहद कर अपना जीवन निर्वहन करने को अब भी मजबूर है।
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