ISRO में नौकरी पाने की क्या है क्वालिफिकेशन? जानें कैसे बनते हैं साइंटिस्ट
ISRO Scientist: इसरो ने 24 अगस्त 2023 को चंद्रयान 3के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिग करा कर इतिहास रच दिया। इसके बाद से ही इसरो चर्चाओं में हैं। इस उपलब्धि को हासिल करने में कई वैज्ञानिकों की दिन रात की मेहनत हैं। इसरो में काम करना कई लोगों का ख्वाब होता है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे आखिर इसरो में नौकरी कैसे मिलती है। और इसरो के वैज्ञानिक कैसे तैयार होते हैं।
दो प्रकार के होते हैं साइंटिस्ट
स्पेस के वैज्ञानिक दो प्रकार के होते हैं फिजिसिस्ट और एस्ट्रोनॉमर। स्पेस साइंटिस्ट वो होते हैं, जो थ्योरेटिकल कांसेप्ट और प्रयोगशाला उपकरणों के लिए काम करते हैं, जबकि एस्ट्रोनॉमर वे हैं जो आकाशगंगाओं, सितारों आदि से संबंधित ब्रह्मांड में रिसर्च करते हैं। ऐसे में ये अहम हो जाता है कि आप कौन से साइटिस्ट बनना चाहते हैं। इसरो और बेंगलुरु में स्थित आईआईएससी कोर्स कराता है। लेकिन कोई भी ये कोर्स नहीं कर सकता। वैज्ञानिक बनने के लिए उम्मीदवार का 10वीं क्लास के बाद फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी, मैथ्स जैसे विषयों का चयन करना महत्वपूर्ण होता है। स्पेस साइंटिस्ट बनने के लिए तीन वर्ष का बीएससी और चार साल के बीटेक से लेकर पीएचडी तक कोर्स होते हैं। इसरो में स्पेस साइंटिस्ट बनने के लिए उम्मीदवार का इंजीनियरिंग या साइंस विषय से पढ़ाई करनी चाहिए।वहीं इसरो में नौकरी पाने के लिए अभ्यर्थी का मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल या कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग पास होना जरूरी होता है। इसके साथ ही एस्ट्रोनॉमी, फिजिक्स, मैथ्स में पीएचडी कर चुके उम्मीदवारों को चुना जाता है।
अप्लाई करने के लिए ये चाहिए होती है योग्यता
वहीं इसरो में अप्लाई करने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 65%अंक या 6.84सीजीपीए के साथ बीई/बीटेक पास होना चाहिए। 12वीं क्लास के बाद इसरो में शामिल होने के लिए उम्मीदवार जेईई एडवांस्ड, किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना या आईआईएसईआर की ओर से आयोजित होने वाले सेंट्रल बोर्ड बेस्ड एप्टीट्यूड टेस्ट पास होना जरुरी होता है। सैलरी की बीत की जाए तो इसरो के वैज्ञानिक को सभी भत्ते लगाकर शुरुआत में करीब 1 लाख रुपये तक का वेतन मिलता है।
ये होनी चाहिए काबिलियत
इसके साथ ही वैज्ञानिकों को किताबी ज्ञान के साथ प्रैक्टिकल ज्ञान होना जरूरी है। वैज्ञानिकों को नई- नई चीजों की खोज करनी होती है जिसके लिए उन्हे प्रैक्टिकल ज्ञान जरूरी है। अपनी मातृभाषा के अलावा अन्य भाषाओं का ज्ञान होना स्पेस साइंटिस्ट में जरूरी है। तभी वो दूसरे देश के साइंटिस्ट से रिसर्च से संबंधित अन्य जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
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