Article 370 Verdict: ‘30 सितंबर तक करवाए जाएं चुनाव’, जानें आर्टिकल 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 10 बड़ी बातें
Article 370 Verdict: सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने अनुच्छेद 370 पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आर्टिकल 370 हटाकर जम्मू कश्मीर को बाकी भारत के साथ जोड़ने की प्रक्रिया मजबूत हुई है और आर्टिकल 370 हटाना संवैधानिक रूप से वैध है। सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 370 के प्रावधानों को खत्म करने के चुनौता देने वाली याचिकाओं पर 16 दिनों की सुनवाई करने के बाद 5 सितंबर को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। ऐसे में हम आपको इस फैसले से जुड़ी 10 बड़ी बातें बताएंगे
- 30 सितंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव कराने होंगे। अपना फैसला सुनाते हुए सीजेआई ने कहा, "हमें सॉलिसीटर जनरल ने बताया कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिया जाएगा। लद्दाख केंद्र शासित क्षेत्र रहेगा। हम निर्देश देते हैं कि चुनाव आयोग नए परिसीमन के आधार पर 30 सितंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव करवाए। राज्य का दर्जा भी जितना जल्द संभव हो, बहाल किया जाए।
- सीजेआई ने अनुच्छेद 370 पर कहा कि राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्य की ओर से केंद्र द्वारा लिए गए हर फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती है। सीजेआई ने कहा कि हम 370को निरस्त करने में कोई दुर्भावना नहीं पाते। असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर अनुच्छेद 370को निरस्त करने के राष्ट्रपति के फैसले पर अपील में नहीं सुन सकते हैं।
- अपने फैसले में सीजेआई ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पास देश के अन्य राज्यों से अलग आंतरिक संप्रभुता नहीं है।सीजेआईने कहा कि Article370को निरस्त करने से पहले संविधान सभा की सिफारिश आवश्यक नहीं थी।
- Article 370 एक अस्थायी प्रावधान है, स्थायी नहीं।
- सीजेआई ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पास कोई आंतरिक संप्रभुता भी नहीं थी। इसका संविधान भारत के संविधान के अधीन था। जम्मू-कश्मीर ने अपनी पूरी संप्रभुता छोड़ दी। सीजेआई ने कहा, भारत में शामिल होने के बाद जम्मू-कश्मीर ने संप्रभुता का तत्व बरकरार नहीं रखा है।
- सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की यह दलील खारिज की कि राष्ट्रपति शासन के दौरान केंद्र द्वारा कोई अपरिवर्तनीय कार्रवाई नहीं की जा सकती।
- अपने फैसले में सीजेआई ने कहा, केंद्र राष्ट्रपति की भूमिका के तहत राज्य सरकार की शक्ति का प्रयोग कर सकता है। याचिकाकर्ताओं की दलीलों को खारिज करते हुए सीजेआई ने कहा कि संसद/राष्ट्रपति उद्घोषणा के तहत किसी राज्य की विधायी शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं।
- सीजेआई ने कहा कि उद्घोषणा के तहत राज्य की ओर से केंद्र द्वारा लिया गया हर निर्णय कानूनी चुनौती के अधीन नहीं हो सकता। इससे अराजकता फैल सकती है। चीफ जस्टिस ने कहा कि जब राष्ट्रपति शासन लागू होता है तो राज्यों में संघ की शक्तियों पर सीमाएं होती हैं।
- चीफ जस्टिस ने दिसंबर 2018 में जम्मू-कश्मीर में लगाए गए राष्ट्रपति शासन की वैधता पर फैसला देने से इनकार किया है, क्योंकि इसे याचिकाकर्ताओं द्वारा विशेष रूप से चुनौती नहीं दी गई थी। सीजेआई ने कहा, यह मानना प्रासंगिक नहीं है कि Article370को निरस्त करने की घोषणा वैध थी या नहीं।
- सीजेआई ने कहा 370को हटाने का मकसद जम्मू-कश्मीर के एकीकरण के लिए है।
दुनिया
देश
कार्यक्रम
राजनीति
खेल
मनोरंजन
व्यवसाय
यात्रा
गैजेट
जुर्म
स्पेशल
मूवी मसाला
स्वास्थ्य
शिक्षा
शिकायत निवारण
Most Popular
Leave a Reply