6 सालों में एडिशनल जज समेत 16 जजों ने दिए इस्तीफे, वजह कर देगी हैरान
Judges Resignation: 4 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस रोहित देव ने इस्तीफा दे दिया था। उनके रिटायरमेंट से दो साल पहले ही पद छोड़ने के फैसले ने सभी को हैरान कर दिया है।न्यायमूर्ति रोहित देव ने शुक्रवार सुबह खुली अदालत में अपने इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वह 'व्यक्तिगत कारणों' से पद छोड़ रहे हैं। वह 2025 में रिटायर होने वाले थे।उन्होंने कहा कि वह 'व्यक्तिगत कारणों' से पद छोड़ रहे हैं। हालाँकि, ऐसी अटकलें हैं कि उन्होंने आसन्न स्थानांतरण के कारण इस्तीफा दे दिया और क्योंकि वह अपने मूल उच्च न्यायालय को नहीं छोड़ना चाहते थे।रिटायरमेंट से पहले ही पद छोड़ने वालों में जस्टिस राहुल देव 12वें जज हैं। साल 2017 से अभी तक 12 जज अलग-अलग कारणों से अपना पद छोड़ चुके हैं।और यदि एडिशनल जज के इस्तीफों को जोड़ लिया जाए तो ये संख्या 12 से बढ़कर 16 हो जाती है।
इस वजह से दिए इस्तीफे
सबके मन में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों इतने इस्तीफे हो रहे है। कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़ने की जजों की अपनी-अपनी वजह रही हैं। कुछ इस्तीफे स्वैच्छिक और व्यक्तिगत आधार पर थे। कुछ जजों ने कार्यकाल के दौरान विशेष परिस्थितियों में इस्तीफा दे दिया, जबकि कई ने दूसरी हाईकोर्ट में ट्रांसफर या चीफ जस्टिस के तौर पर प्रोमोशन लेने से इनकार करते हुए पद छोड़ने का फैसला किया।
इससे पहले इन्होंने दिए इस्तीफे
इससे पहले जस्टिस पाटिल ने 2017 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर की वजह से इस्तीफा दे दिया था। उस वक्त वह कर्नाटक हाईकोर्ट में दूसरे सबसे सीनियर जज थे, वह इस बात से नाराज थे कि उन्हें कर्नाटक हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस या कार्यकारी चीफ जस्टिस के तौर पर नियुक्त किए जाने के बजाए उनका ट्रांसफर कर दिया गया। वहीं जस्टिस नक्का बालायोगी ने हैदराबाद में हाईकोर्ट में स्थाई जज बनाए जाने के एक साल बाद ही इस्तीफा दे दिया था। राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया, लेकिन इसके प्रभावी होने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया और 2019 तक पद पर रहे।
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