सुप्रीम कोर्ट ने मेनका गांधी पर दी तीखी प्रतिक्रिया, कोर्ट की अवमानना मत करिए
Supreme Court: आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि मेनका गांधी ने अदालत को लेकर जो टिप्पणियां की हैं, वह न्यायालय की अवमानना है। कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उनसे यह भी पूछा है कि जब वह केंद्रीय मंत्री थीं, तब उन्होंने कुत्तों को लेकर कितना बजट उपलब्ध करवाया था। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच के सामने आज की सुनवाई में मेनका गांधी की तरफ से भी पक्ष रखा गया। उन्होंने कुत्तों की बेहतर देखभाल, जनसंख्या नियंत्रण और एंटी रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता जैसे सुझाव दिए. इस दौरान कोर्ट ने उनके वकील को आड़े-हाथों लेते हुए कहा, 'हमने आपके क्लाइंट के पॉडकास्ट देखे हैं. उसमें कोर्ट के प्रति किस तरह की भाषा और बॉडी लैंग्वेज का इस्तेमाल हो रहा है, यह भी देखा है. इन बातों को अवमानना के तौर पर देखा जा सकता है। हमारी उदारता है कि हम इस बारे में कुछ नहीं कर रहे हैं.' कोर्ट ने यह सवाल भी किया कि जिस तरह के सुझाव उन्हें दिए जा रहे हैं, उनकी मुवक्किल ने केंद्रीय मंत्री रहते कुत्तों को लेकर कितना बजट उपलब्ध करवाया।
पांच साल से नियम लागू नहीं होने पर चिंता
एक रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने उस वक्त यह बात कही जब डॉग लवर्स की तरफ से सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण दलील दी रहे थे और उन्होंने पिछली सुनवाई में कोर्ट की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। तभी मेनका गांधी के वकील राजू रामचंद्रन ने कहा कि बार और बेंच में रहते हुए सतर्क रहने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि बीते पांच वर्षों से आवारा पशुओं को लेकर बने नियमों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया है। कोर्ट ने नगर निकायों और राज्यों की निष्क्रियता पर सवाल उठाए।
मेनका गांधी का पक्ष
मेनका गांधी पहले भी आवारा कुत्तों के खिलाफ ‘जबरदस्ती वाले रवैये’ का विरोध करती रही हैं। उनका कहना रहा है कि समस्या कुत्ते नहीं, बल्कि नगर निकायों की नाकामी है. उनके अनुसार, नसबंदी कार्यक्रम कागजों तक सीमित हैं, कचरा प्रबंधन फेल है और अस्पताल खुले में कचरा फेंक रहे हैं। ऐसे में कुत्तों को दोषी ठहराना समस्या का समाधान नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में अगली सुनवाई 28 जनवरी को करेगा। कोर्ट ने अब तक पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और NGO समेत दूसरे पक्षों को सुना है. कोर्ट ने कहा कि वह अगली सुनवाई में एमिकस क्यूरी, NHAI और केंद्र और राज्यों का पक्ष सुनेगा।
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