Mayawati: UGC विवाद पर आया मायावती का बयान, सवर्णों को लेकर कर दीं बड़ी मांग!
Mayawati On UGC Rules: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के नए नियमों के बाद बवाल मच गया है। इस मामले पर 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियम पर रोक लगा दी है। साथ ही 2012 वाले नियम को प्रभावी करने का आदेश दिया है।
मामले की सुनवाई करते हुए उच्चमत न्यायालय ने कहा कि यूजीसी के नए नियम को फिर से ड्रॉफ्ट किया जाए। अब इस मामले पर बसपा सुप्रीमो मायावती का रिएक्शन भी आ गया है। उन्होंने जनरल कैटेगरी के लिए खास मांग की है।
बसपा प्रमुख ने क्या कहा?
बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि यूजीसी द्वारा देश के सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों में जातिवादी घटनाओं को कम करने के लिए लाया गया है। जिससे कारण सामाजिक में तनाब बढ़ गया है। ऐसे वर्तमान हालात के मद्देनजर रखते हुए सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नए नियम पर रोक लगाने का आज का फैसला उचित, जबकि देश में, इस मामले में सामाजिक तनाव आदि का वातावरण पैदा ही नहीं होता। मायावती ने कहा कि अगर यूजीसी नए नियम को लागू करने से पहले सभी पक्ष से बात करती और जांच कमेटी में भी अपरकास्ट समाज को नेचुरल जस्टिस के अन्तर्गत उचित प्रतिनिधित्व दे देती।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, यूजीसी ने 13 जनवरी को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नए नियम जारी किए थे। इसे लेकर उच्चतम न्यायालय पहुंचे याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी इन नियमों में केवल एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के खिलाफ सामाजिक भेदभाव का जिक्र है। इसमें सामान्य वर्ग को भेदभाव का शिकार मानने की बात नहीं कही गई है। हालांकि, इस पर सुनवाई हुई और चीफ जस्टिस ने आजादी के 75 सालों के बाद भी जातिगत भेदभाव जारी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी करते हुए 13 जनवरी को लागू किए गए नियम पर रोक लगा दी है।
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