Super El Nino: भीषण गर्मी, सूखा और खाने की कमी...अगले साल आने वाली है 'तबाही', जानें क्यों चिंतित हैं वैज्ञानिक?
Super El Nino: अमेरिका के जलवायु पूर्वानुमान केंद्र ने कहा है कि 'सुपर अल नीनो' का असर अगले साल पूरे उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में देखा जा सकता है। एजेंसी के मुताबिक 75-85 फीसदी संभावना है कि यह अल नीनो बहुत शक्तिशाली होगा। इसके कारण नवंबर से जनवरी के बीच भूमध्यरेखीय समुद्र का औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।
क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर ने कहा है कि इस सुपर अल नीनो के कारण पूरी दुनिया के मौसम का मिजाज प्रभावित होगा। तमाम तरह की आपदाएं भी आ सकती हैं। 30 फीसदी संभावना है कि इस अल नीनो के कारण तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। जिससे भीषण गर्मी पड़ेगी। इसके अलावा सूखा और बाढ़ जैसी आपदाएं भी आ सकती हैं।
8 साल पहले आया था ऐसा अल नीनो
इसी प्रकार का सुपर अल नीनो वर्ष 1997-98 और 2015-16 में हुआ था। तब भी तापमान बढ़ गया था और कई देशों में जगह-जगह सूखे और बाढ़ की समस्या देखने को मिली थी। 'द वेदर चैनल' के मुताबिक, इस अल नीनो के बाद इस बात की काफी संभावना है कि लंबे समय में बारिश और संभवत: सर्दियों के तापमान पर भी असर पड़ेगा।
कौन से देश होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित?
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस अल नीनो का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और कृषि पर दिखेगा। कई देशों में फसल उत्पादन पर नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देश, जहां तापमान पहले से ही गर्म है, सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर भारत के संदर्भ में देखें तो ऐसे कई इलाके हैं जहां पहले से ही जल संकट है और सिंचाई के लिए पानी मुश्किल से ही उपलब्ध है। ऐसे में अल नीनो प्रभाव के कारण सूखे की समस्या उत्पन्न हो सकती है। भोजन का संकट भी उत्पन्न हो सकता है।
हालांकि, भारतीय मौसम विभाग का अनुमान है कि भारत में सुपर अल नीनो का असर सामान्य रहेगा। जिस समय इस अल नीनो की आशंका जताई जाती है वह उत्तर पूर्वी मानसून का समय होता है, जो अक्टूबर से दिसंबर तक चलता है। मौसम विभाग ने कहा है कि इस अल नीनो के बावजूद दक्षिण भारत में सामान्य बारिश हो सकती है।
आख़िर क्या है अल नीनो?
सरल भाषा में कहें तो अल नीनो एक प्रभाव है जिसके कारण तापमान बढ़ता है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है तो अल नीनो का असर दिखता है।
जैसे ही मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ता है, पश्चिमी प्रशांत में गर्म पानी भूमध्य रेखा के साथ पूर्व की ओर बढ़ता है और भारत को प्रभावित करता है। अल नीनो अपने साथ अत्यधिक गर्मी लेकर आता है। राजस्थान जैसे रेगिस्तानी इलाकों में सूखे की स्थिति बन सकती है।
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