डेरा राधा स्वामी प्रमुख गुरिंदर ढिल्लों को मना रहे 71वां जन्मदिन, जानें उनकी खास बातें
Gurinder Dhillon Birthday: 01अगस्त 2025को डेरा राधा स्वामी सत्संग ब्यास (RSSB) के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों का 71वां जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया। 1990से डेरे के आध्यात्मिक संरक्षक के रूप में सेवा दे रहे बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने 33वर्षों तक संगत को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया है। उनकी सादगी, गहन आध्यात्मिक दृष्टिकोण और मानवता के प्रति समर्पण ने लाखों अनुयायियों के दिलों में विशेष स्थान बनाया है।
गुरिंदर सिंह ढिल्लों का प्रारंभिक जीवन
बता दें, बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों का जन्म 01अगस्त 1954को हुआ था। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के शिमला हिल्स में लॉरेंस स्कूल, सनावर से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की और बाद में पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से वाणिज्य में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। साल 1990में वह अपने मामा महाराज चरण सिंह की इच्छा पर वह भारत लौटे और राधा स्वामी सत्संग ब्यास के आध्यात्मिक प्रमुख का दायित्व संभाला।
RSSB का विस्तार
साल 1990में डेरे की बागडोर संभालने के बाद बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने राधा स्वामी सत्संग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। 1891में बाबा जैमल सिंह द्वारा स्थापित यह आध्यात्मिक संगठन आज विश्व के 90से अधिक देशों में फैला हुआ है, जिसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, स्पेन, न्यूजीलैंड और अफ्रीका जैसे देश शामिल हैं। उनके नेतृत्व में डेरे ने न केवल आध्यात्मिकता को बढ़ावा दिया, बल्कि सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। डेरे के पास 4000एकड़ से अधिक जमीन है, जिसमें 48एकड़ का विशाल लंगर हॉल शामिल है, जहां रोजाना हजारों लोगों को मुफ्त भोजन प्रदान किया जाता है।
बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों के मार्गदर्शन में डेरा राधा स्वामी सत्संग ब्यास ने मानवता की सेवा में कई उल्लेखनीय कार्य किए। डेरे द्वारा संचालित तीन अस्पताल मुफ्त चिकित्सा सेवाएं प्रदान करते हैं, खासकर ब्यास के 35किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों के लिए। हाल ही में, अमृतसर की डिप्टी कमिश्नर साक्षी साहनी के अनुरोध पर डेरे ने जिले के लगभग 6000टीबी मरीजों के लिए पौष्टिक आहार की व्यवस्था की, जिससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हो सके। इसके अलावा आपदा के समय डेरा प्रबंधन द्वारा विशेष राहत कार्य किए जाते हैं, जो समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।
विवादों से दूरी
बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने हमेशा डेरे को राजनीतिक विवादों से दूर रखा है। हाल ही में, उन्होंने डेरे में वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। ताकि सभी अनुयायियों को समान महत्व मिले और आध्यात्मिक एकता को बढ़ावा दिया जा सके। यह कदम उनके समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
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