Gangaur Puja 2026: 20 या 21 मार्च...कब मनाई जाएगी गणगौर? यहां देखें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Gangaur Puja 2026 Date: उत्तर भारत के त्योहारों में गणगौर का अपना अलग ही महत्व है। राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में खास तौर पर मनाए जाने वाले इस पर्व पर महिलाएं भगवान शिव और माता गौरी (पार्वती) की पूजा करके वैवाहिक सुख, सौभाग्य और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। लेकिन इस बार कई लोग कन्फ्यूज है कि गणगौर पूजा 20या 21मार्च कब की जाएगी। तो चलिए जानते है गणगौर का पर्व कब मनाई जाएगी।
गणगौर पूजा की सही तिथि और समय
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर का मुख्य पर्व मनाया जाता है। ऐसे में तृतीया तिथि की शुरूआत 21मार्च की सुबह 02:30बजे होगी। जिसकी समापन रात 11:56बजे इसलिए 20मार्च को सिर्फ कुछ प्रारंभिक रस्में (जैसे ज्वारा रोपण या सिंजारा) हो सकती हैं, लेकिन पूजा और व्रत 21मार्च को ही रखा जाएगा।
गणगौर पूजा का शुभ मुहूर्त
पूजा का सबसे शुभ समय सुबह का है, जब भक्ति भाव में मां गौरी की आराधना की जा सके। अभिजीत मुहूर्त और संध्या काल भी शुभ माने जाते हैं।
1. मुख्य पूजा मुहूर्त:सुबह 7:55बजे से 9:26बजे तक रहेगा
2. ब्रह्म मुहूर्त:सुबह 4:49बजे से 5:36बजे तक
गणगौर पूजा सामग्री
- ईसर-गौरी की मूर्तियां (मिट्टी/लकड़ी की)
- लकड़ी की चौकी या बाजोट
- कलश, तांबे का लोटा, गंगाजल
- हल्दी, कुमकुम, रोली, अक्षत (चावल)
- फूल, फूलमाला, दूब घास
- सिंदूर, मेहंदी, काजल, चूड़ी, मंगलसूत्र
- दीपक, घी, कपूर, अगरबत्ती
- नैवेद्य – हलवा, पूड़ी, मिठाई, फल (केला, नारियल, सेब)
- पान के पत्ते, सुपारी, लौंग-इलायची
- ज्वारा (गेहूं के अंकुरित बीज)
- गुड़, गेहूं का आटा, चंदन
- रंग-बिरंगे कपड़े, मौली (कलावा)
- नारियल, सिक्के, दक्षिणा
गणगौर पूजा की सरल विधि
1. सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें, स्वच्छ कपड़े पहनें।
2. पूजा स्थल को साफ करके लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
3. मिट्टी या लकड़ी की बनी ईसर (शिव) और गौर (पार्वती) की मूर्तियां स्थापित करें।
4. कलश में गंगाजल भरकर ज्वारा (गेहूं के अंकुर) रखें।
5. मूर्तियों को मेहंदी, सिंदूर, चूड़ी, मंगलसूत्र और नए वस्त्र अर्पित करें।
6. षोडशोपचार पूजा करें – जल, अक्षत, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य, फल आदि चढ़ाएं।
7. गणगौर गीत गाएं और मनोकामना व्यक्त करें।
8. आरती उतारें, प्रसाद बांटें और व्रत का पारण करें।
गणगौर पूजा के मंत्र
1. मुख्य बीज मंत्र:ॐ ह्रीं गौरीपतये स्वाहा (108बार जप करें)
2. विवाह और सौभाग्य मंत्र:कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि । नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः ॥
3. आरती मंत्र:जय गंगा गौरी, मैया जय गंगा गौरी...
गणगौर पूजा का महत्व
यह पर्व मुख्य रूप से महिलाओं का है। विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्रार्थना करती हैं। गणगौर के 18 दिनों का उत्सव होली के बाद शुरू होता है और तृतीया पर समाप्त होता है।
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