संगीता राघव ने SDM बनने के लिए छोड़ दी वर्ल्ड बैंक की नौकरी, जानें क्या है इनकी कहानी
Sangeeta Raghav Motivational Story: संघ लोक सेवा और राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती हैं। हर साल लाखों युवा इन परीक्षाओं में बैठते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही लोगों को मिलती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है यूपी पीसीएस अधिकारी संगीता राघव की, जिन्होंने वर्ल्ड बैंक जैसी प्रतिष्ठित संस्था की नौकरी छोड़कर प्रशासनिक सेवा में आने का सपना पूरा किया और आज सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) के पद पर कार्यरत हैं।
पिता हैं भारतीय नौसेना से रिटायर्ड
संगीता राघव हरियाणा के गुरुग्राम स्थित शांति नगर की रहने वाली हैं। उनका परिवार अनुशासन और सेवा भाव से जुड़ा रहा है। उनके पिता भारतीय नौसेना से रिटायर्ड अधिकारी हैं, जबकि उनकी मां एक गृहिणी हैं। बचपन से ही संगीता को पढ़ाई और सामाजिक मुद्दों में गहरी रुचि रही। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई और ग्रेजुएशन गुरुग्राम से ही पूरी की।
इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से किया मास्टर
उच्च शिक्षा के लिए संगीता ने दिल्ली का रुख किया और इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री हासिल की। मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से पीएचडी में दाखिला लिया। इसी दौरान उन्होंने यूपी पीसीएस परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दी। पढ़ाई के साथ-साथ परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन संगीता ने हार नहीं मानी।
वर्ल्ड बैंक ने दिया था मौका
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मास्टर डिग्री के बाद संगीता को वर्ल्ड बैंक से जुड़े एक अहम प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका मिला। यह प्रोजेक्ट साउथ एशियन इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर किया गया था। इस दौरान उन्हें नेपाल और हिमाचल प्रदेश जैसे स्थानों पर भी काम के सिलसिले में जाना पड़ा। वर्ल्ड बैंक में काम करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, लेकिन संगीता का सपना प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए सीधे काम करने का था।
साल 2017में दी थीयूपी पीसीएस की परीक्षा
संगीता ने साल 2017 में पहली बार यूपी पीसीएस परीक्षा दी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। यह असफलता उनके लिए बड़ा झटका थी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी तैयारी का विश्लेषण किया, गलतियों को समझा और पहले से ज्यादा मेहनत के साथ दोबारा तैयारी शुरू की।
साल 2018 में जब उन्होंने दूसरी बार यूपी पीसीएस परीक्षा दी, तो उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरा रैंक हासिल किया। यह सफलता उनके संघर्ष और धैर्य का परिणाम थी। आज संगीता राघव एक सफल SDM के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं और प्रशासनिक सेवा के जरिए लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए काम कर रही हैं।संघर्ष से सफलता तक का यह सफर हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है। संगीता राघव की कहानी यह साबित करती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
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