कांगना रनौत को हाईकोर्ट से लगा झटका, फिर से खुलेगी मानहानी केस की फाइल
Kangana Ranaut's Defamation Case Resume: बॉलीवुड एक्ट्रेस और मंडी से BJP सांसद कंगना रनौत को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से हाल ही में एक बड़ा झटका लगा है। किसान आंदोलन के दौरान उनके एक विवादास्पद ट्वीट से जुड़े मानहानि मामले में हाई कोर्ट ने निचली अदालत में ट्रायल फिर से शुरू करने का आदेश दिया है। यह मामला 2020में कंगना द्वारा किए गए उस ट्वीट से संबंधित है, जिसमें उन्होंने बठिंडा की बुजुर्ग महिला मोहिंदर कौर को 'शाहीन बाग की दादी' कहकर संबोधित कर दावा किया था कि वह 100रुपये की दिहाड़ी पर किसान आंदोलन में शामिल हुई थीं। इस ट्वीट को मोहिंदर कौर ने अपमानजनक और उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला माना, जिसके बाद उन्होंने कंगना के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज किया था।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, साल 2020में कृषि कानूनों के खिलाफ चले किसान आंदोलन के दौरान कंगना रनौत ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर मोहिंदर कौर की तस्वीर साझा की थी। इस पोस्ट में उन्होंने मोहिंदर कौर को शाहीन बाग आंदोलन से जोड़ा और उनकी उपस्थिति को आंदोलन में पैसे के लिए शामिल होने का दावा किया। मोहिंदर कौर ने इस ट्वीट को भ्रामक और उनकी मानहानि करने वाला करार देते हुए बठिंडा की स्थानीय अदालत में कंगना के खिलाफ शिकायत दर्ज की। उन्होंने कहा कि इस पोस्ट से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को गंभीर ठेस पहुंची और उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।
कंगना ने इस शिकायत को रद्द करने के लिए 2022में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया था। उस समय हाई कोर्ट ने कंगना को अंतरिम राहत देते हुए बठिंडा की निचली अदालत में ट्रायल पर 08सितंबर 2022तक रोक लगा दी थी। कोर्ट ने शिकायतकर्ता और पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। कंगना के वकील ने दलील दी थी कि अभिनेत्री ने कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं रखा था और उन्होंने बाद में माफी भी मांग ली थी। हालांकि, मोहिंदर कौर ने दावा किया कि कंगना ने न तो उनसे औपचारिक माफी मांगी और न ही अन्य किसानों के प्रति अपनी टिप्पणियों को वापस लिया।
हाई कोर्ट का ताजा फैसला
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हाल ही में इस मामले में सुनवाई करते हुए कंगना की याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही, बठिंडा की ट्रायल कोर्ट को मामले की सुनवाई फिर से शुरू करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने माना कि शिकायत में प्रथम दृष्टया मानहानि का मामला बनता है और इसे निचली अदालत में विधिवत सुनवाई की जरूरत है। इस फैसले ने कंगना के लिए कानूनी चुनौतियों को और बढ़ा दिया है, क्योंकि अब उन्हें बठिंडा कोर्ट में पेश होकर ट्रायल का सामना करना होगा।
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