Meta की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर उठ रहे सवाल, सोशल मीडिया बढ़ा सकती है लोगों की परेशानी!
Meta Privacy Policy 2026: सोशल मीडिया कंपनी Meta की नई प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर दुनियाभर में चर्चा हो रही है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और थ्रेड्स इस्तेमाल करने वाले यूजर्स अब ये सोचने पर मजबूर हैं कि उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर कितनी निगरानी रखी जा रही है। Meta ने साफ किया है कि अब वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल और ज्यादा करेगी, ताकि यूजर्स के व्यवहार को समझ कर उन्हें पर्सनलाइज्ड विज्ञापन दिखाए जा सकें। कंपनी का दावा है कि इससे लोगों को वही विज्ञापन दिखेंगे, जिनमें उनकी रुचि है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि ये निजता के लिए खतरा बन सकता है।
AI के भरोसे चलेंगे सिस्टम
यह बदलाव किसी छोटे अपडेट तक सीमित नहीं है। Meta अपने पूरे विज्ञापन सिस्टम को AI के भरोसे चलाने की तैयारी में है। नई पॉलिसी के मुताबिक, कंपनी का AI यह ट्रैक करेगा कि यूज़र कौन से पोस्ट लाइक कर रहे हैं, क्या सर्च कर रहे हैं, किसे मैसेज भेज रहे हैं और Meta AI से क्या बातचीत कर रहे हैं। यहां तक कि बातचीत से जुड़ी मेटाडेटा जानकारी, जैसे कीवर्ड और विषय भी AI सिस्टम में शामिल की जाएगी।
डेटा के आधार पर होगा विज्ञापन टारगेट
Meta का कहना है कि वह किसी इंसान की तरह निजी मैसेज नहीं पढ़ती, लेकिन इसी डेटा के आधार पर विज्ञापन टारगेट किए जाएंगे। यही बात प्राइवेसी एक्सपर्ट्स और सामाजिक संगठनों को परेशान कर रही है। उनका मानना है कि यूज़र्स की बातचीत का इस्तेमाल विज्ञापनों के लिए करना सीमाओं का उल्लंघन है। अब Meta AI को फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप में सीधे जोड़ दिया गया है। अगर कोई यूज़र AI से ट्रैकिंग, फिटनेस, यात्रा या किसी और विषय पर सवाल पूछता है, तो उसके बाद उसी से जुड़े विज्ञापन उसके फीड में दिखने लगेंगे। Meta का दावा है कि इससे बेवजह और अनचाहे विज्ञापन कम होंगे।
पॉलिसी के खिलाफ केस हुए दर्ज
हालांकि, इस पॉलिसी के खिलाफ 36 अलग-अलग संगठन अमेरिका के फेडरल ट्रेड कमीशन में शिकायत दर्ज करा चुके हैं। इन संगठनों का कहना है कि Meta सहमति और डेटा सुरक्षा से जुड़े नियमों को नजरअंदाज कर रही है। वहीं, Meta का कहना है कि उसने अक्टूबर 2025 में ही यूजर्स को इन बदलावों की जानकारी दे दी थी और AI से चलने वाले विज्ञापन यूजर्स के लिए बेहतर हैं। कुल मिलाकर, आने वाले समय में Meta के ऐप्स पर AI का असर और बढ़ेगा। भले ही विज्ञापन ज्यादा पसंद के हों, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि यूजर अपने डेटा पर कितना नियंत्रण रख पाएंगे।
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