नया बांग्लादेश, नया फैसला! यूनुस सरकार ने शेख मुजीबुर्रहमान का 'राष्ट्रपिता' दर्जा किया खत्म
Bangladesh: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिससे देश की राजनीति और समाज में हलचल मच गई है। स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक माने जाने वाले और देश के पहले प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर्रहमान से ‘राष्ट्रपिता’ का दर्जा आधिकारिक रूप से हटा दिया गया है। एक नए अध्यादेश के ज़रिए कानून में बड़े बदलाव किए गए हैं, जिससे न सिर्फ उनके योगदान को दोबारा परिभाषित किया गया है, बल्कि उनके नाम और भूमिका को कई कानूनी दस्तावेज़ों से पूरी तरह हटा दिया गया है।
'राष्ट्रपिता' शब्द हटाया गया
इस बदलाव के तहत कानून में जहां-जहां 'राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान' का जिक्र था, उन सभी स्थानों से यह शब्द हटा दिया गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब इस कानून में शेख मुजीबुर्रहमान का नाम पूरी तरह से शामिल नहीं रहेगा। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब हाल ही में अंतरिम सरकार ने बांग्लादेश की नई करंसी से भी शेख मुजीब की तस्वीर हटा दी थी।
स्वतंत्रता सेनानी की नई परिभाषा
सरकार द्वारा जारी नए अध्यादेश के मुताबिक, अब स्वतंत्रता सेनानी की परिभाषा में भी बदलाव किया गया है। पहले मुजीबनगर सरकार से जुड़े सभी सांसदों और संविधान सभा के सदस्यों को स्वतंत्रता सेनानी माना जाता था, लेकिन अब उन्हें 'स्वतंत्रता संग्राम के सहयोगी' नामक एक नई श्रेणी में रखा गया है। इस फैसले ने देश में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी पार्टियों ने इस बदलाव की आलोचना करते हुए कहा है कि यह देश के इतिहास से छेड़छाड़ है। वहीं, अंतरिम सरकार का तर्क है कि यह कदम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट और समकालीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने के लिए उठाया गया है।
अब क्या होगा बांग्लादेश भविष्य ?
यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति में नए विवादों को जन्म दे सकता है। जो की शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वे लंबे समय से शेख मुजीब को राष्ट्रपिता के रूप में स्थापित करती रही हैं।
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