होर्मुज संकट के बीच भारत को राहत, एलपीजी सप्लाई पर सरकार का बड़ा बयान
Iran War 2026: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे कई देशों में तेल और गैस संकट की आशंका बढ़ गई है। भारत भी इससे अछूता नहीं है, क्योंकि देश अपनी लगभग 60 फीसदी एलपीजी जरूरत आयात करता है। इसी बीच यह खबरें सामने आई थीं कि ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से भारी रकम वसूल रहा है। हालांकि, सरकार ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। शिपिंग मंत्रालय के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश सिन्हा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत समुद्र में आवाजाही की पूरी आजादी है और कोई भी देश इस पर टैक्स या लेवी नहीं लगा सकता। उन्होंने कहा कि इस तरह की खबरें पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
ईरानी दूतावास ने दावों को किया खारिज
भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने भी इन दावों को खारिज किया है। दूतावास ने साफ कहा कि जहाजों से 20 लाख डॉलर वसूलने की खबरें गलत हैं और इनका कोई आधार नहीं है। वहीं, भारत की भूमिका पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री कई देशों के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं। भारत शांति और कूटनीति के जरिए समाधान चाहता है।
दो भारतीय जहाज होर्मुज पार कर चुके
इस बीच भारत के लिए राहत की खबर भी आई है। ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’ नाम के दो भारतीय जहाज होर्मुज पार कर चुके हैं। इन जहाजों में करीब 92,612 मीट्रिक टन एलपीजी है और इनमें 60 भारतीय नाविक सवार हैं। ये जहाज 26 से 28 मार्च के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच सकते हैं। फिलहाल होर्मुज क्षेत्र में भारत के 20 जहाज मौजूद हैं, जिनमें 5 एलपीजी टैंकर शामिल हैं। इनमें करीब 2.30 लाख मीट्रिक टन गैस है। सरकार इनकी सुरक्षा और आवाजाही पर लगातार नजर रख रही है। ईंधन की कमी की अफवाहों पर पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी सफाई दी है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस का पर्याप्त भंडार है। लगभग एक लाख पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और कहीं भी कमी की स्थिति नहीं है।
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