2050 तक 900 करोड़ रह जाएगी दुनिया की आबादी, स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
इंसानों की आबादी विश्व भर में लगभग 79.5करोड़ है और यह संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। वर्तमान में, दुनिया की आबादी तेजी से बढ़ रही है और विश्व जनसंख्या के विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, 2050तक विश्व जनसंख्या काफि कम हो सकती है।
बता दें कि जनसंख्या कम होने के पीछे हवा का प्रदूषित होना बताया गया है। UN DESA की विश्व पॉपुलेशन प्रॉसपेक्ट्स 2022 की रिपोर्ट में कहा गया था कि 900 करोड़ की आबादी साल 2037 में हो जाएगी। 2058 तक तो 1000 करोड़ पार कर जाएगी। लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है। इंसानों की बढ़ती आबादी के अपने फायदे और नुकसान है। जैसे कम आबादी को कम ऊर्जा की जरूरत होती है।
सदी के अंत तक 600 से 760 करोड़ हो जाएगी आबादी
वहीं दुनिया 1980 से बहुत बदल चुकी है। जन्मदर,बचत,उधारी का स्तर,टैक्स रेट,इनकम मॉडल सब बदल गया है। इसकी गणना के मुताबिक इस सदी के बीच तक धरती पर इंसानों की आबादी 880 करोड़ हो जाएगी। लेकिन बाद में यह 2100 तक घटकर 730 करोड़ हो जाएगी। इसके साथ ही वैश्विक असंतुलन,इकोलॉजिकल फुटप्रिंट,वाइल्डलाइफ का विलुप्त होना आगे चलकर आर्थिक स्थिति और आबादी को बर्बाद करेगा। सबसे अच्छी स्थिति जो मानी जा रही है, वो है जायंट लीप।
यानी 2040 तक इंसानों की संख्या 850 करोड़ हो जाएगी। लेकिन सदी के अंत तक यह घटकर 600 करोड़ हो जाएगी। लेकिन सदी के अंत तक यह घटकर 600 करोड़ हो जाएगी। कुल मिलाकर आबादी कम होने की सबसे बड़ी वजह है आर्थिक असंतुलन और जलवायु परिवर्तन होगा। वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण धुएं का उत्सर्जन, वाहनों का धुआं और कारखानों के जलाने से उत्पन्न होता है। इससे अस्थमा, श्वसन संबंधी समस्याएं, कैंसर और अन्य संक्रमणों के कारणों से सम्बंधित समस्याएं होती हैं।
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