ईरान-इजरायल युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा, 20 देशों की आर्थिक स्थिति हो सकती प्रभावित
Iran-Israel War: ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का असर सिर्फ इन देशों तक सीमित नहीं है। अमेरिका और यूरोप से लेकर एशिया और दक्षिण एशिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था भी इस संघर्ष से प्रभावित हो रही है। तेल, गैस और समुद्री व्यापार से जुड़ी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में यह युद्ध भारी व्यवधान पैदा कर सकता है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्ग से दुनिया के लगभग एक-तिहाई तेल का व्यापार होता है। अगर युद्ध नहीं रुका, तो तेल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ेगी और औद्योगिक उत्पादन महंगा होगा।
प्रभावित हुए ये देश
इससे प्रभावित देशों में अमेरिका, चीन, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, स्पेन जैसे बड़े औद्योगिक राष्ट्र शामिल हैं। अमेरिका खुद तेल उत्पादक है, लेकिन वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ती है। चीन अपनी अधिकांश ऊर्जा जरूरतें मध्य-पूर्व से आयात करता है, इसलिए उद्योग और सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80% आयात करता है। तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि से पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे, महंगाई बढ़ेगी और व्यापार घाटा बढ़ सकता है। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर भी असर होगा, क्योंकि ये देश ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर हैं। मध्य-पूर्व के सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन जैसी अर्थव्यवस्थाएं सीधे युद्ध क्षेत्र में हैं। इन देशों में तेल और गैस का उत्पादन और निर्यात प्रभावित होने से वैश्विक बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
क्या है विशेषज्ञ की राय?
यूरोपीय देशों जैसे नीदरलैंड, बेल्जियम, जर्मनी और फ्रांस पर भी तेल-गैस और शिपिंग लागत बढ़ने का असर पड़ेगा। ये देश ऊर्जा और व्यापार के लिए मध्य-पूर्व पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध जारी रहने पर सिर्फ बड़े औद्योगिक देश ही नहीं, बल्कि विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था भी संकट में आ सकती है।
सप्लाई चेन में आ सकती है बाधा
वैश्विक तेल-गैस की कीमतें बढ़ेंगी, महंगाई बढ़ेगी और सप्लाई चेन में व्यवधान आएगा। यही कारण है कि दुनियाभर के 20 से अधिक देशों की आर्थिक स्थिति इस युद्ध से प्रभावित हो सकती है। इसलिए विशेषज्ञों ने सभी देशों से सतर्क रहने और ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की सलाह दी है, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर कम से
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