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Uttrakhand News:नशा मुक्त उत्तराखंड के लिए देहरादून घोषणा-पत्र जारी, राज्यपाल बोले- अभियान को जन आंदोलन बनाना होगा

Uttrakhand News:नशा मुक्त उत्तराखंड के लिए देहरादून घोषणा-पत्र जारी, राज्यपाल बोले- अभियान को जन आंदोलन बनाना होगा

Uttrakhand News:लोक भवन में बुधवार को ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान’के तहत ‘एक प्रयास, नशा मुक्त हो समाज’कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और नशा मुक्त समाज के निर्माण में शिक्षण संस्थानों व समुदाय की भागीदारी बढ़ाना रहा।

कार्यक्रम के दौरान ‘नशा मुक्त उत्तराखंड हेतु देहरादून घोषणा-पत्र’जारी किया गया। इसमें प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के लिए आम लोगों की भागीदारी और ठोस कदम उठाने पर जोर दिया गया है। घोषणा-पत्र में युवाओं को नशे से दूर रखने में परिवार की भूमिका मजबूत करने, नशे की लत से जूझ रहे लोगों के उपचार एवं पुनर्वास तथा समाज की सक्रिय भागीदारी समेत 10 प्रमुख संकल्प शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर उत्तराखंड को नशा मुक्त बनाने के प्रयासों को गति देना है।

शिक्षण संस्थानों में नशा विरोधी माहौल पर चर्चा

कार्यक्रम में ‘व्यसन मुक्त, सशक्त शैक्षणिक संस्थानों का निर्माण’ विषय पर विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। इसका संचालन अनूप नौटियाल ने किया। चर्चा में दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, CIMSR ग्रुप ऑफ कॉलेज एवं सजग इंडिया के अध्यक्ष ललित जोशी, DBS ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. संजय जसोला और स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने शिक्षण संस्थानों में नशा विरोधी वातावरण तैयार करने, विद्यार्थियों की काउंसलिंग और जागरूकता अभियानों को प्रभावी बनाने पर विचार साझा किए।

इसके बाद ‘नशा मुक्त समाज-समुदाय आधारित’ विषय पर परिचर्चा हुई। वरिष्ठ पत्रकार अनुपम त्रिवेदी के संचालन में हुई इस चर्चा में विशेष प्रमुख सचिव, खेल अमित कुमार सिन्हा, मैक्स हॉस्पिटल की वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. सलोनी, उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर और IG निलेश आनंद भरणे ने अपने विचार रखे।

राज्यपाल बोले- नशे के खिलाफ अभियान को जन आंदोलन बनाएं

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करता, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए भी गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान को सिर्फ सरकारी प्रयासों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे जन आंदोलन का रूप देना जरूरी है।उन्होंने कहा कि इस अभियान में युवाओं, शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने पर जोर

राज्यपाल ने कहा कि युवाओं में ऊर्जा, प्रतिभा और राष्ट्र निर्माण की अपार क्षमता है। इस ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए खेल, शिक्षा, कौशल विकास, रचनात्मक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से खुद नशे से दूर रहने और अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने कहा कि नशा मुक्ति के लिए जागरूकता, रोकथाम, उपचार और पुनर्वास पर एक साथ काम करना होगा। शिक्षण संस्थानों में नशा मुक्त वातावरण के साथ विद्यार्थियों के लिए काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की प्रभावी व्यवस्था भी जरूरी है।

परिवार और माताओं की भूमिका अहम

राज्यपाल ने नशे की समस्या से निपटने में परिवार, विशेषकर मां की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जब परिवार का कोई बेटा नशे की गिरफ्त में आता है तो उसकी पीड़ा सबसे ज्यादा मां महसूस करती है। इसलिए नशा मुक्ति के प्रयासों में मातृशक्ति की भागीदारी बेहद अहम है।

नुक्कड़ नाटक से दिया नशा मुक्ति का संदेश

कार्यक्रम में दून विश्वविद्यालय के थिएटर विभाग की ओर से नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। इसके जरिए युवाओं को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया। छात्र-छात्राओं के लिए प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने नशे की लत से बचाव, मानसिक स्वास्थ्य, पुनर्वास और नशा छोड़ने के बाद सामान्य जीवन में लौटने जैसे विषयों पर विशेषज्ञों से सवाल किए।

इस अवसर पर राज्यपाल ने डॉ. रोहित रस्तोगी की पुस्तक ‘नशा मुक्त नव-निर्माण’का विमोचन किया। साथ ही उपस्थित विद्यार्थियों और प्रतिभागियों को ‘नशा मुक्ति संकल्प’ दिलाया गया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र भसीन, सचिव शैलेश बगोली, सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन, विधिक सलाहकार राज्यपाल कौशल किशोर शुक्ल समेत शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, गणमान्य अतिथि और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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