Haryana Weather: हरियाणा के दक्षिणी जिलों लोहारू, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और चरखी दादरी में रविवार को तेज हवाओं, अंधड़ और छिटपुट बूंदाबांदी का असर देखने को मिला। वहीं प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आंशिक बादल छाए रहे, लेकिन गर्मी का प्रभाव बरकरार रहा।
हिसार, भिवानी, कुरुक्षेत्र और अंबाला में दिनभर तेज धूप निकली। अंबाला में सुबह हल्की बूंदाबांदी जरूर हुई, लेकिन बाद में उमस भरी गर्मी ने लोगों को परेशान किया।
11 जून तक मौसम में बड़े बदलाव की संभावना नहीं
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल हरियाणा में मौसम सामान्य रूप से शुष्क बना रहेगा। मौसम वैज्ञानिक डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि 11 जून तक प्रदेश में किसी बड़े मौसमीय बदलाव की संभावना नहीं है।
हालांकि 10 जून को एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से दक्षिणी हरियाणा के कुछ हिस्सों में तेज हवाएं चल सकती हैं और कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है।
12 जून से बदलेगा मौसम का मिजाज
मौसम विभाग के अनुसार 12 जून को एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से 12 से 14 जून के बीच प्रदेश के कई क्षेत्रों में मौसम बदल सकता है।
इस दौरान तेज हवाएं चलने, बादल छाने और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने के आसार हैं। मौसम में इस बदलाव से लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।
रोहतक रहा सबसे गर्म, तापमान पहुंचा 43.6 डिग्री
रविवार को प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान रोहतक में 43.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा हिसार में 42.4 डिग्री और अंबाला में 41.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।
वहीं करनाल और कैथल अपेक्षाकृत ठंडे रहे, जहां अधिकतम तापमान क्रमशः 38.3 और 38.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
झज्जर में सबसे कम न्यूनतम तापमान
प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान झज्जर में 22.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा रोहतक में 23.8 डिग्री और महेंद्रगढ़ में 24 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।
अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 38 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच और न्यूनतम तापमान 22 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा।
19 जून के बाद फिर बदल सकता है मौसम
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 19 जून के आसपास प्रदेश में एक बार फिर मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। यदि इस दौरान अच्छी बारिश होती है तो किसानों के लिए बाजरे की बुआई शुरू करने की अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को मौसम के पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखने और खेती से जुड़े निर्णय उसी के अनुसार लेने की सलाह दी है।