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“जल संगम से जन संगम – एकता का उत्सव” पटेल चौक पर सरदार पटेल की प्रतिमा पर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने 25 पवित्र नदियों से किया जलार्पण

“जल संगम से जन संगम – एकता का उत्सव” पटेल चौक पर सरदार पटेल की प्रतिमा पर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने 25 पवित्र नदियों से किया जलार्पण

Delhi News: दिल्ली के पटेल चौक पर आज आयोजित भव्य कार्यक्रम “जल संगम से जन संगम – एकता का उत्सव” में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री, पवित्र मार्गेरेटा, दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद और बांसुरी स्वराज, सांसद की उपस्थिति में सरदार बल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर देश की 25पवित्र नदियों से लाए गए जल का जलार्पण कर यूनिटी यात्रा को हरी झंडी दिखा कर वॉर मेमोरियल तक  रवाना किया। मुख्यमंत्री के साथ साथ शिक्षा मंत्री आशीष सूद और सभी विशिष्ट अतिथियों ने भी लगभग 3किलोमीटर की यूनिटी यात्रा में चलकर लोगों का उत्साह वर्धन किया। भारत माता की जयकार से यात्रा का पूरा मार्ग गुंजायमान हो गया।

इस अवसर पर दिल्ली के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी, NSS के स्वयंसेवक, MY Bharat के ऊर्जावान सदस्य, शिक्षकगण तथा शिक्षा विभाग एवं अन्य विभागों के अधिकारी भी यात्रा मार्ग में योगदान कर रहे थे।इस अवसर पर शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि “Sardar @150” का यह पर्व सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ आत्ममंथन का भी अवसर है  कि क्या हम उस भारत को आगे बढ़ा पा रहे हैं जिसका सपना सरदार पटेल ने देखा था।उन्होंने कहा, “‘Sardar @150’ विचारों की गंगा का प्रवाह है। आज हम उस लौ को नमन कर रहे हैं जिसने विभाजन के अंधकार में एकता की ज्योति प्रज्वलित की।

केवल लिखा नहीं जाता बल्कि विचारों और कर्मों से जिया जाता है- सूद

सूद ने आगे कहा कि यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि इतिहास केवल लिखा नहीं जाता बल्कि विचारों और कर्मों से जिया जाता है।पटेल चौक से आरंभ होने वाली यह ‘जल यात्रा’ भारत की उस चेतना का प्रतीक है, जो सरदार वल्लभभाई पटेल ने हमें दी थी। यह “Unity March” भारत की विविधता और एकता का उत्सव है।उन्होंने बताया कि ‘जल संगम से जन संगम’ की इस यात्रा में 150विद्यार्थी और शिक्षक देश की 25सांस्कृतिक नदियों से जल एकत्र कर यमुना के संगम में अर्पित करेंगे। यह जल भारत की एकता का प्रतीक है।

दिल्ली के बच्चे कश्मीर की झेलम, असम की ब्रह्मपुत्र, गुजरात की नर्मदा और दक्षिण की गोदावरी जैसी पवित्र नदियों से यह जल लेकर आए हैं। इस प्रयास का संदेश स्पष्ट है की भारत कोई भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक जीवंत राष्ट्रपुरुष है। यह चेतना हमारी नदियों में बहती है, हमारे सैनिकों की धड़कनों में बसती है और हमारी बेटियों की आंखों में चमकती है।

सूद ने कहा कि जब 1947में भारत स्वतंत्र हुआ तब हमारे पास संविधान तो था पर एक संगठित राष्ट्र नहीं था 562रियासतें, 562सीमाएं और 562स्वार्थ।तब एक लौहपुरुष खड़ा हुआ जिसने कहा कि “यह देश जुड़ने के लिए बना है।वह थे सरदार वल्लभभाई पटेल जिन्होंने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति और दूरदर्शिता से इन सभी रियासतों को एक सूत्र में पिरो दिया। उन्होंने अपने निर्णयों, साहस और मानवीय संवेदना से दिल्ली को फिर से जीवंत किया।

हर कॉलोनी में उस पुनर्वास की कहानी बसती है- शिक्षा मंत्री

शिक्षा मंत्री ने बताया कि जब पंजाब, सिंध और सीमांत प्रांतों से लाखों हिंदू शरणार्थी दिल्ली पहुंचे तब उनके पुनर्वास की पूरी जिम्मेदारी सरदार पटेल ने स्वयं उठाई।राहत शिविरों से लेकर पुनर्वास कॉलोनियों तक उन्होंने दिल्ली को वह ‘शेल्टर सिटी’ बनाया, जिसने टूटे हुए परिवारों को फिर से जीने का हौसला दिया। आज दिल्ली के हर मोहल्ले, हर बाजार और हर कॉलोनी में उस पुनर्वास की कहानी बसती है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली की पहचान ही विविधता है यहां कश्मीर की खुशबू है, पंजाब की मिट्टी है, राजस्थान का रंग है, बंगाल की संस्कृति है और दक्षिण भारत की परंपराएं हैं। यह विविधता यूँ ही नहीं बनी; इसके पीछे सरदार पटेल की वह राष्ट्रदृष्टि थी, जिन्होंने कहा था कि “भारत विविधताओं का संगम है और दिल्ली उसका आईना।आज दिल्ली का हर नागरिक, चाहे वह किसी भी राज्य से आया हो, पटेल के उसी विचार का जीवंत प्रमाण है।

आशीष सूद ने कहा कि आज जब हम ‘जल संगम से जन संगम’ की यह यात्रा निकाल रहे हैं, तो इसका सबसे बड़ा संदेश यही है कि दिल्ली एक बार फिर देश को एकता का मार्ग दिखाने के लिए तैयार है।जिस दिल्ली को पटेल ने विपत्ति से उठाया, वही दिल्ली आज यह संदेश दे रही है की हम माँ यमुना को भी स्वच्छ रखेंगे और माँ भारती को भी अखंड रखेंगे।उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे NSS और MY Bharat के माध्यम से सरदार पटेल के सपनों को 21वीं सदी की शक्ति बनाएं।एकता ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति और उसका सबसे सुंदर आभूषण है।धन, सत्ता या संसाधन से अधिक कोई देश तभी समृद्ध होता है जब उसके लोग एक सूत्र में बंधे हों और सरदार पटेल ने वही सूत्र रचा जिसने भारत को राष्ट्र बनाया।

सूद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 2014से सरदार पटेल जयंती को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप 5बल्कि विभाजन की अंतिम दीवार का गिरना था।उन्होंने यह भी कहा कियह यात्रा उन लोगों के लिए भी उत्तर है जो भारत की आत्मा को बाँटने का प्रयास करते हैं। हम उन्हें यह संदेश दे रहे हैं की भारत नदी की तरह है, जो हर मोड़ पर मिलती है, पर कभी टूटती नहीं।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में जब विद्यार्थी मां यमुना का पवित्र जल लेकर निकले, तो वे केवल जल नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को साथ लेकर जा रहे थे।वे यह संदेश दे रहे थे किहम मां यमुना को भी स्वच्छ रखेंगे और मां भारती को भी अखंड रखेंगे।

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