Success Story: आज हम आपको एक लड़की की ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं, जो UPSC एस्पिरेंट्स के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। आपको बता दें कि इनका नाम है यशवी जैन, जो दिल्ली की रहने वाली हैं। आइए जानते हैं IAS यशवी जैन की सक्सेस स्टोरी के बारे में।
यशवी के माता-पिता कॉर्पोरेट सेक्टर में करते हैं काम
जहां कई UPSC उम्मीदवार-कड़ी मेहनत करने और अपना पूरा दिन परीक्षा की तैयारी में समर्पित करने के बावजूद-महज़ कुछ अंकों से चूक जाते हैं, वहीं यशवी जैन ने एक साथ दो जिम्मेदारियां निभाते हुए IAS अधिकारी का पद हासिल किया है। यशवी दिन में एक प्रैक्टिसिंग डेंटिस्ट के तौर पर मरीजों का इलाज करती थीं और रात में यूपीएससी की तैयारी करती थीं। दिल्ली के ग्रेटर कैलाश की रहने वाली यशवी के माता-पिता दोनों ही कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करते हैं।
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यशवी ने 12वीं के बाद NEET परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी और नीट क्लियर करने के बाद उन्होंने बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) का कोर्स किया. इसके बाद उन्होंने प्रैक्टिसिंग डेंटिस्ट के तौर पर नौकरी शुरू की और लोगों को उनकी डेंटल प्रॉब्लम से निजात दिलाने में मदद की.
मामा से प्रेरित होकर बनी IAS
यशवी के मामा इंडियन इन्फॉर्मेशन सर्विस (IIS) में एक अधिकारी थे. वह उनके परिवार के इकलौते सदस्य थे, जो सरकारी नौकरी में थे और यशवी के लिए उनके मामा ही प्रेरणा का स्रोत बने. उन्हीं को देखकर यशवी के मन में UPSC का ख्याल आया. उसके बाद तो सिविल सर्विसज के जरिए देश की सेवा करना उनका एकमात्र लक्ष्य बन गया. हालांकि यशवी अपनी परीक्षा की तैयारी के लिए प्रोत्साहित करने का श्रेय अपनी मां नीतू जैन और पिता राजीव जैन को देती हैं.
रात में की UPSC की तैयारी
यूपीएससी की तैयारी करते वक्त यशवी की दिनचर्या किसी आम UPSC एस्पिरेंट की तरह नहीं थी, क्योंकि वो यूपीएससी की तैयारी के साथ-साथ एक डेंटिस्ट के तौर पर भी काम कर रही थीं. यशवी दिन में मरींजों का इलाज करती थीं और रात में खुद को किताबों, नोट्स और मॉक टेस्ट में मग्न कर लेती थीं. इन दो-दो जिम्मेदारियों को एक साथ निभाना उनके लिए कभी आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और जी-जान से तैयारी में जुटी रहीं.
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97वीं रैंक हासिल कर बनीं IAS
यशवी ने अपनी UPSC की तैयारी साल 2023 में शुरू की थी. हालांकि अपने पहले प्रयास में वो फेल हो गईं थीं. आमतौर पर एग्जाम में फेल होने पर या कम अंक आने पर कई कैंडिडेट्स का मनोबल टूट जाता है, लेकिन यशवी ने हार नहीं मानी. उन्होंने खुद को और बेहतर तरीके से तैयार किया और 2025 में दोबारा एग्जाम दिया. इस बार वो न सिर्फ पास हुईं बल्कि ऑल इंडिया 97वीं रैंक हासिल करने में भी सफल रहीं और आईएएस अधिकारी बन गईं. यशवी कहती हैं कि 10-15 घंटों की पढ़ाई जरूरी नहीं बल्कि बिना किसी गैप के प्रतिदिन पढ़ाई करना जरूरी होता है.