India-Nepal Border Dispute:भारत ने नेपाल के साथ बॉर्डर विवाद को सुलझाने के लिए तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को खारीज कर दिया है। भारत का तब आया है, जब नेपाल के पीएम बालेन शाह ने कहा था कि नेपाल भारत के साथ सीमा मुद्दा सुलझाने के लिए ब्रिटेन और चीन की मध्यस्थता चाहता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों पक्षों ने बॉर्डर मुद्दे के सभी पहलुओं से निपटने के लिए द्विपक्षीय तंत्र स्थापित किए हैं और भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 फीसदी हिस्सा सीमांकित किया जा चुका है।
क्या कहा बालेन शाह ने
हाल में ही खत्म हुए नेपाल चुनाव में बालेन शाह की पार्टी ने बंपर जीत हासिल की थी। जिसके बाद बालेन शाह नेपाल के प्रधानमंत्री बने थे। 31 मई को बालेन शाह ने कहा था कि चूकि यह समस्या उस समय से चली आ रही है जब अंग्रेजों ने इस क्षेत्र को छोड़ा था। इसलिए हमारा मानना है कि इस मामले में ब्रिटेन को भी शामिल किया जाना चाहिए। बता दें कि नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर पुराना विवाद है। भारत ने स्पष्ट कहा है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा है।
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नेपाल ने चीन को भेजा नोट
नेपाल के पीएम बालेन शाह ने कहा था कि सीमा विवाद भारत और नेपाल के बीच का नहीं है। बल्कि इसकी ऐतिहासिक जड़े ब्रिटिश इंडिया के दौरे जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि नेपाल ने इस मुद्दे पर चीन और ब्रिटेन के साथ कूटनीतिक बातचीत की है, क्योंकि यह विवाद 1947 में ब्रिटिश शासन के अंत के समय से जुड़ा हुआ है। बालेन शाह ने यह भी कहा कि नेपाल सरकार ने भारत और चीन दोनों को इस मुद्दे पर कूटनीति नोट दिए हैं।