Haryana News: हरियाणा में महिला सरपंचों के पति और उनके रिश्तेदारों को टेंशन देने वाली यह खबर है। दरअसल हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने एक जरुरी आदेश जारी किया है जिसके तहत महिला सरपंचों के पति या फिर रिश्तेदार को सरकारी कार्यवाही में भाग लेने की इजाजत नहीं होगी। राज्य सूचना आयोग ने इस व्यवस्था को लोकतांत्रिक और महिला सशक्तिकरण के खिलाफ बताया है।
राज्य सूचना आयोग ने स्पष्ट किया कि महिला सरपंचों को मिले अधिकार, कर्तव्य और जिम्मेदारियां व्यक्तिगत रूप से निर्वाचित जनप्रतिनिधि से जुड़ी हैं, जिन्हें किसी अनधिकृत व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी राज्य सूचना आयुक्त डा अजय कुमार सूरा ने महेंद्रगढ़ जिले के रामबास गांव से जुड़े सूचना का अधिकार (आरटीआई) मामले की सुनवाई के दौरान की।
इस मामले में आरटीआई आवेदक रविंद्र कुमार ने आयोग को बताया कि 24 अप्रैल 2025 को दायर आवेदन के बावजूद उसे अब तक वांछित सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है। दूसरी ओर ग्राम पंचायत की ओर से उपस्थित कुलदीप कुमार ने आयोग को बताया कि मांगी गई सूचना विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध है और इस संबंध में आवेदक को सूचित भी किया जा चुका है।
इसी दौरान आयोग का ध्यान इस तथ्य की ओर गया कि ग्राम पंचायत रामबास की निर्वाचित महिला सरपंच सरोज स्वयं उपस्थित नहीं हुईं और उनकी ओर से उनके पति कुलदीप कुमार ने पक्ष रखा।इस पर गंभीर टिप्पणी करते हुए आयोग ने कहा कि अनेक मामलों में यह देखा गया है कि महिला सरपंचों के पति स्वयं को ‘सरपंच प्रतिनिधि’ बताकर सरकारी बैठकों और कार्यवाहियों में हिस्सा लेते हैं।
यह प्रवृत्ति ग्रामीण प्रशासन में व्याप्त पितृसत्तात्मक मानसिकता का प्रतीक है और महिलाओं को मिले संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करती है। आयोग ने कहा कि पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षण का उद्देश्य केवल सीटों को भरना नहीं, बल्कि महिलाओं को स्थानीय शासन में प्रभावी भूमिका देना है। आयोग ने अपने आदेश में हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देश भेजने का आदेश दिया है।
साथ ही सभी जिला विकास एवं पंचायत अधिकारियों तथा खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करने को कहा गया है कि राज्य सूचना आयोग के समक्ष आने वाले मामलों में महिला सरपंच स्वयं उपस्थित हों। उनके स्थान पर पति या अन्य कोई अनधिकृत व्यक्ति प्रतिनिधित्व नहीं करेगा।आयोग ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में किसी महिला सरपंच की ओर से पुरुष प्रतिनिधि पेश होता है तो ऐसी कार्यवाही को शून्य माना जा सकता है। मामले में आवश्यक टिप्पणियों और निर्देशों के साथ आयोग ने अपील का निपटारा कर दिया।