Haryana News: हरियाणा के यमुनानगर सहित पूरे प्रदेश के पशुपालकों के लिए अच्छी खबर है। अब अच्छी नस्ल की गाय, भैंस या बकरी खरीदने के लिए पशु मेलों और डेयरियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पशुपालन विभाग प्रदेश के करीब 70 लाख पशुओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर रहा है, जिससे पशुओं की खरीद-बिक्री पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी हो जाएगी। पशुपालन विभाग ने मुंह-खुर और गलघोटू रोग के टीकाकरण अभियान को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया है। इसके तहत प्रत्येक पशु की जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जा रही है। यह डेटा भारत पशुधन ऐप पर उपलब्ध होगा, जहां पशुपालक घर बैठे पशुओं की पूरी जानकारी देख सकेंगे।
ऐप पर महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध होंगी
ऐप पर पशु की नस्ल, उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, टीकाकरण का रिकॉर्ड और दूध उत्पादन क्षमता जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध होंगी। इससे पशुपालकों को अपनी जरूरत और बजट के अनुसार सही पशु चुनने में मदद मिलेगी। इस अभियान को सफल बनाने के लिए प्रदेशभर में 550 से अधिक पशु चिकित्सक और 2500 पशुधन विकास सहायक (VLDA) लगाए गए हैं। ये टीमें गांव-गांव और घर-घर जाकर पशुओं का टीकाकरण करने के साथ-साथ उनका डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार कर रही हैं।
क्या है विभाग का उद्देश्य?
विभाग का उद्देश्य पशुधन का एक प्रमाणिक और अपडेटेड डेटाबेस तैयार करना है। इसके बाद अगर कोई पशुपालक अधिक दूध देने वाली मुर्राह भैंस, अच्छी नस्ल की गाय या किसी खास प्रकार की बकरी खरीदना चाहता है, तो वह मोबाइल ऐप पर उसकी जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से पशु खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता और क्षमता का सही आकलन किया जा सकेगा। इससे पशुपालकों को गलत जानकारी के आधार पर पशु खरीदने का जोखिम भी कम होगा।
समय और पैसे की होगी बचत
डेयरी व्यवसाय से जुड़े भूपेंद्र कुमार और कुलदीप सिंह का कहना है कि यह पहल पशुपालकों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी। साथ ही पशुओं की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी और बेहतर नस्ल के पशुओं तक लोगों की पहुंच आसान होगी। पशुपालन विभाग को उम्मीद है कि डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन जानकारी की सुविधा से प्रदेश में डेयरी व्यवसाय को भी नई गति मिलेगी और पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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