SC on Delhi SIR process: दिल्ली में चुनाव आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत 33 लाख मतदाताओं को भेजे गए नोटिसों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मंगलवार को सुनवाई करने का फैसला किया है। बता दें, ये सुनवाई चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ करेगी।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, दिल्ली में SIR की प्रक्रिया 30 जून 2026 से 17 अगस्त 2026 तक चली थी, जिसके बाद 31 अगस्त 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई। जिसमें कुल 1,45,10,299 मतदाताओं में से करीब 47.7 लाख नाम काटे गए। यानी इस प्रक्रिया में अभी 97.5 लाख मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं। लेकिन इन शामिल नामों में से लगभग 33 लाख लोगों को 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' और 'अनमैप्ड' (पुराने रिकॉर्ड से न मिलान) श्रेणी में रखा गया है, जिसके आधार पर उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि जिन नामों को पहले से ही अनुपस्थित, मृत या डुप्लीकेट श्रेणी में रखा गया है, ये 33 लाख लोगों की लिस्ट इससे अलग हैं।
जिसके बाद इन नोटिसों के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग ने न नोटिस से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया। याचिका में आगे यह कहा गया है कि जिन 33 लाख लोगों को ये नोटिस भेजे जा रहे हैं, उनके नाम चुनाव आयोग की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से दिखाए नहीं गए , इसलिए स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो रही है और न ही नोटिस भेजने का कोई सही कारण बताया गया है। इस वजह से आम जनता ने SIR की अंतिम सूची से नाम कटे, इसके लिए उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। तो वहीं, कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई का फैसला किया।