Nainital Hockey Tournament: उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल का ऐतिहासिक फ्लैट्स मैदान एक बार फिर हॉकी के रोमांच से गुलजार हो उठा है। यहां करीब 100 वर्ष पुरानी प्रतिष्ठित हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आई टीमें हिस्सा ले रही हैं। हर शाम मैदान में रोमांचक मुकाबले खेले जा रहे हैं और बड़ी संख्या में खेल प्रेमी खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने पहुंच रहे हैं। फ्लैट्स मैदान केवल एक खेल मैदान नहीं, बल्कि भारतीय हॉकी के गौरवशाली इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यही वह मैदान है जहां कभी देश के नामी हॉकी खिलाड़ियों और ओलंपियन खिलाड़ियों ने अपने खेल का प्रदर्शन किया था। इस मैदान ने कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।
इतिहासकार ने क्या कहा?
इतिहासकार प्रोफेसर अजय रावत के अनुसार, फ्लैट्स मैदान का इतिहास वर्ष 1880 में हुए विनाशकारी भूस्खलन से जुड़ा है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद झील के उत्तरी हिस्से में जमा मलबे से इस मैदान का निर्माण हुआ। वर्ष 1883 में नैनीताल जिमखाना कमेटी के गठन के बाद यहां खेल गतिविधियों को संगठित रूप मिला और हॉकी, क्रिकेट तथा पोलो जैसे खेलों का आयोजन शुरू हुआ।
हॉकी मुकाबलों की लोकप्रियता बढ़ी
समय के साथ यहां होने वाले हॉकी मुकाबलों की लोकप्रियता बढ़ती गई। स्थानीय व्यापारियों द्वारा शुरू किए गए ‘ट्रेडर्स मैच’ बाद में ‘ऑल इंडिया ट्रेडर्स हॉकी टूर्नामेंट’ के रूप में प्रसिद्ध हुए। 1960 के दशक तक यह प्रतियोगिता देशभर में पहचान बना चुकी थी और कई बड़ी टीमें इसमें भाग लेने नैनीताल आती थीं।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने रखी थी स्टेडियम की आधारशिला
खिलाड़ियों और दर्शकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वर्ष 1959 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने यहां स्टेडियम की आधारशिला रखी। इसके बाद 1963-64 में स्टेडियम का निर्माण पूरा हुआ और खेल गतिविधियों को नई गति मिली। फ्लैट्स मैदान ने कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को भी तैयार किया है। यहां से जुड़े खिलाड़ी ओलंपिक तक पहुंचे और भारत का नाम रोशन किया। सैय्यद अली ने 1976 मॉन्ट्रियल ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जबकि राजेंद्र सिंह रावत ने गोलकीपर के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
हॉकी प्रतियोगिता दोबारा किया जाएगा आयोजित
करीब एक सदी पुरानी इस हॉकी प्रतियोगिता के दोबारा आयोजन से नैनीताल का खेल इतिहास फिर से जीवंत हो उठा है। स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि यह मैदान आने वाले वर्षों में भी नई प्रतिभाओं को मंच प्रदान करता रहेगा और भारतीय हॉकी को मजबूत बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।
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