PoK Violence: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के रावलाकोट में 27 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर कथित कार्रवाई के बाद पाकिस्तान के कई बड़े शहरों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इस्लामाबाद, रावलपिंडी, लाहौर और कराची में बड़ी संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतरकर सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोगों के साथ एकजुटता भी दिखाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शहबाज शरीफ सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने नागरिक और राजनीतिक अधिकारों की मांग कर रहे लोगों की आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग किया। लोगों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं।
इंटरनेट सेवाओं पर लगी पाबंदियां
बताया जा रहा है कि रावलाकोट की घटना के बाद लोगों में काफी नाराजगी है। इंटरनेट सेवाओं पर लगी पाबंदियां, सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और क्षेत्रीय चुनावों के बहिष्कार की अपील ने भी विरोध को और बढ़ा दिया है। इस्लामाबाद के F-10 मार्केट इलाके में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। यहां पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर मुश्ताक अहमद खान के नेतृत्व में रैली निकाली गई। उन्होंने रावलाकोट में हुई कथित पुलिस कार्रवाई की निंदा की और घटना में हुई मौतों और घायल लोगों के मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
कई संगठनों के लोग शामिल
इस प्रदर्शन में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के समर्थक, मानवाधिकार कार्यकर्ता और कश्मीरी समुदाय से जुड़े कई संगठनों के लोग भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार शांतिपूर्ण विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने 27 जुलाई की घटना की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी उठाई।
भारी पुलिस बलों की तैनाती
वहीं, लाहौर में प्रदर्शन से पहले लाहौर प्रेस क्लब के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई रास्तों पर बैरिकेड लगाए गए और दंगा नियंत्रण पुलिस भी तैनात की गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कदम सार्वजनिक सभाओं को रोकने की कोशिश थी। पुलिस की सख्ती के बावजूद कई प्रदर्शनकारी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के झंडे लेकर अलग-अलग स्थानों पर पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि झंडा लेकर चलने वाले कई लोगों, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
मरियम नवाज को लेकर लोगों में रोष
लाहौर में प्रदर्शनकारियों का गुस्सा खासतौर पर पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज की सरकार के खिलाफ भी देखने को मिला। लोगों ने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने के लिए प्रशासनिक और पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है। फिलहाल पाकिस्तान में इस मुद्दे को लेकर तनाव बना हुआ है। प्रदर्शनकारी नागरिक अधिकारों की सुरक्षा, गिरफ्तार लोगों की रिहाई और रावलाकोट की घटना की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
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