Vande Bharat Maintainence: वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के निर्माण और लंबे समय तक रखरखाव के लिए भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) और टिटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (TRSL) के बीच जॉइंट वेंचर बनने जा रहा है। दोनों कंपनियों ने 15 सितंबर 2026 को जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। नई कंपनी 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट की लॉन्ग टर्म मेंटेनेंस और सपोर्ट व्यवस्था संभालेगी।
यह समझौता भारतीय रेलवे की ओर से BHEL-टिटागढ़ कंसोर्टियम को दिए गए करीब 24,000 करोड़ रुपये के बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट में 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट का निर्माण और सप्लाई करने के साथ-साथ 35 साल तक इनके व्यापक रखरखाव की जिम्मेदारी भी शामिल है। इस तरह 15 सितंबर 2026 से 35 साल की अवधि देखें तो इन ट्रेनसेट के रखरखाव की व्यवस्था करीब 2061 तक जारी रहेगी।
BHEL और टिटागढ़ की 50:50 हिस्सेदारी
जॉइंट वेंचर कंपनी में BHEL और टिटागढ़ रेल सिस्टम्स की बराबर 50:50 हिस्सेदारी होगी। यह कंपनी प्रोजेक्ट के तहत तैयार किए जाने वाले 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट की मेंटेनेंस और सपोर्ट से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालेगी। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य सिर्फ नई ट्रेनें तैयार करके रेलवे को उपलब्ध कराना नहीं है। इसमें ट्रेनसेट के लंबे समय तक संचालन को ध्यान में रखते हुए रखरखाव, सपोर्ट और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की व्यवस्था भी शामिल है।
24,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में क्या-क्या शामिल?
BHEL-टिटागढ़ कंसोर्टियम को मिले करीब 24,000 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट में कई महत्वपूर्ण काम शामिल हैं। इनमें 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट का निर्माण और सप्लाई प्रमुख है। इसके अलावा 35 साल तक व्यापक मेंटेनेंस, सरकारी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का अपग्रेडेशन और ट्रेनसेट डिपो को अपग्रेड करने का काम भी प्रोजेक्ट का हिस्सा है।
प्रोजेक्ट के प्रमुख हिस्से
80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट का निर्माण और सप्लाई
35 साल तक व्यापक मेंटेनेंस
सरकारी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का अपग्रेडेशन
ट्रेनसेट डिपो का अपग्रेडेशन
ट्रेनसेट के लिए लॉन्ग टर्म सपोर्ट
35 साल की मेंटेनेंस व्यवस्था क्यों अहम?
इस प्रोजेक्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात 80 ट्रेनसेट के लिए 35 साल की व्यापक मेंटेनेंस व्यवस्था है। आधुनिक ट्रेनसेट के लिए केवल निर्माण और सप्लाई ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि लंबे समय तक उनके सुरक्षित और सुचारू संचालन के लिए नियमित रखरखाव और तकनीकी सपोर्ट भी जरूरी होता है।
मैन्युफैक्चरिंग के साथ ही लंबे समय तक मेंटेनेंस की जिम्मेदारी तय होने से ट्रेनसेट के पूरे लाइफसाइकिल को ध्यान में रखकर काम किया जा सकेगा। टिटागढ़ रेल सिस्टम्स के मुताबिक, यह समझौता BHEL और TRSL के बीच लंबे समय तक चलने वाली साझेदारी को मजबूत करता है। कंपनी ने कहा है कि भारतीय रेलवे का फोकस एडवांस्ड पैसेंजर रेल सिस्टम के लिए लाइफसाइकिल आधारित सपोर्ट पर बढ़ रहा है।
कंपनी के अनुसार, घरेलू स्तर पर ट्रेन निर्माण और लंबे समय तक मेंटेनेंस की क्षमता को एक साथ लाने से वंदे भारत स्लीपर फ्लीट की लगातार ऑपरेशनल रेडीनेस बनाए रखने में मदद मिलेगी।
लंबी दूरी की यात्रा के लिए तैयार वंदे भारत स्लीपर
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन प्रोजेक्ट का मुख्य फोकस लंबी दूरी की रेल यात्रा को आधुनिक और आरामदायक बनाने पर है। इन ट्रेनसेट को यात्रियों की सुविधा, आधुनिक डिजाइन और नई तकनीक को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है। जनवरी 2026 में हावड़ा-कामाख्या-हावड़ा रूट पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के संचालन की दिशा में अहम कदम उठाया गया था। इस ट्रेन को BEML ने चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) की तकनीक के आधार पर विकसित किया था।
अब BHEL और टिटागढ़ रेल सिस्टम्स के बीच हुआ नया समझौता 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के निर्माण के साथ-साथ उनके लंबे समय तक रखरखाव और सपोर्ट की व्यवस्था को भी आगे बढ़ाता है। इससे भारतीय रेलवे के लिए इन ट्रेनसेट के संचालन और मेंटेनेंस को लंबे समय तक व्यवस्थित रखने की योजना को मजबूती मिलेगी।