Ebola outbreak Congo: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार तेजी से फैल रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में 72 नए केस सामने आए हैं। जबकि कुल कन्फर्म मामलों की संख्या 782 पहुंच गई है। जिनमें से अब तक 181 लोगों की मौत हो चुकी है।
बता दें, यह प्रकोप मई 2026 में इटुरी प्रांत के मोंगबवालु और रवामपारा स्वास्थ्य क्षेत्रों से शुरू हुआ था, जो अब इटुरी, नॉर्थ किवु तथा साउथ किवु प्रांतों में फैल चुका है। जानकारी के अनुसार. वर्तमान में कुल 25 से ज्यादा स्वास्थ्य क्षेत्र इबोला वायरस से प्रभावित हैं। बच्चों सहित स्वास्थ्यकर्मी भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
WHO ने क्या कहा?
इबोला के बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पहले से ही ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी अलर्ट जारी कर रखा है। इसके अलावा WHO ने टेस्टिंग, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और मरीजों के इलाज की प्रक्रिया को तेज करने और एक्टिव केस फाइंडिंग के सख्त निर्देश दिए हैं। साथ ही, अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) भी सक्रिय हो गई है। Africa CDC के प्रमुख जीन कासेया का कहना है कि जब तक इस वायरस का संक्रमण पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता, तब तक हम अपने प्रयास जारी रहेंगे और जल्द-से-जल्द इसका समाधान निकालेंगे।
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कांगो में इबोला का 17वां प्रकोप
बता दें, इबोला वायरस की पहचान साल 1976 में की गई थी। जिसके बाद से कांगो में इबोला का यह 17वां प्रकोप है। इसके बाद साल 2018-2020 में इसका सबसे घातक रूप देखा गया, जिसमें 1000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। हालांकि, इस बार इबोला का प्रकोप बुंडिबुग्यो स्ट्रेन (Bundibugyo ebolavirus) की वजह से हुआ है। खतरे वाली बात यह है कि अभी तक इस वायरस का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है।
इबोला कितना खतरनाक है?
इबोला एक गंभीर हेमोरेजिक फीवर है, जिसका संबंध फिलोवायरस परिवार से है। यह संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, मल, पसीने, लार और मृत व्यक्ति के शव को छूने से या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, त्वचा पर रैश जैसी समस्या शामिल हैं।