यूपी में मंदिर-मजिस्द का विवाद! लेकिन ये धार्मिक स्थल देते हैं भाईचारा और मोहब्बत का पैगाम

यूपी में मंदिर-मजिस्द का विवाद! लेकिन ये धार्मिक स्थल देते हैं भाईचारा और मोहब्बत का पैगाम

Mandir-Masjid Controversy: इस समय उत्तर प्रदेश में मंदिर-मजिस्द का विवाद गरमाया हुआ है। बाबरी मजिस्द हो या राम मदिर इसे लेकर राज्य में काफी विरोघ-प्रदर्शन भी हुए। तो वहीं, अब संभल में शाही जामा मजिस्द के बाद से भड़की हिंसा ने इस विवाद को और ज्यादा बढ़ा दिया है। लेकिन उत्तर प्रदेश शुरु से ऐसा नहीं था। उत्तर प्रदेश हमेशा से आपसी सौहार्द और अमन का पैगाम देता आया है। 

उत्तर प्रदेश को धार्मिक लोगों का स्थल माना जाता है। क्योंकि यहां महावीर मंदिर भी है और पंडाइन की मस्जिद भी। यहां वहीं, बरेली का लक्ष्मी नारायण मंदिर हो या बुध मस्जिद। ये सभी लोगों को आपसी मोहब्बत और एकता में बांधे रखने का संदेश देते हैं। लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इन मंदिरों का निर्माण मुस्लिम समुदाय ने किया। तो वहीं, मस्जिद का निर्माण हिंदू समुदाय ने किया।

महावीर मंदिर, लखनऊ

‘मुस्कराइए आप लखनऊ में हैं' ये लाइन हमने अक्सर हमें कई फिल्मों में सुनी होगी। लखनऊ की नगरी कई सदियों से सुलहकुल का पैगाम देती आ रही है। लेकिन क्या आपको पता है लखनऊ में एक ऐसा मंदिर भी मौजूद है, जिसे मुस्लिम समुदाय ने बनवाया था। लखनऊ के अलीगंज में स्थित महावीर मंदिर का निर्माण 6 जून 1783 को किया गया था। इस प्राचीन मंदिर को नवाब सआदत अली खान की मां बेगम आलिया ने बनवाया था।

पंडाइन मस्जिद, लखनऊ

लखनऊ के अमीनाबाद इलाके में स्थित पंडाइन की मस्जिद हिंदू-मुस्लिम एकता के साथ दोस्ती की निशानी है। इतिहासकारों के मुताबिक, इस भव्य मस्जिद का निर्माण 18वीं सदी में कराया गया था। इसका निर्माण ब्राह्मण महिला रानी जय कुंवर पांडे ने अपनी प्रिय मित्र ख़दीजा खानम के लिए करवाया था। ख़दीजा खानम अवध के पहले नवाब अमीन सआदत खान बुरहान-उल-मुल्क की पत्नी थीं। रानी जय कुंवर पांडे अमीनाबाद की मालिक थी।  वह तत्कालीन अवध नवाब, सआदत अली खान की बेगम की करीबी दोस्त थीं. उनकी दोस्ती इतनी गहरी थी कि उन्होंने अपनी दोस्त खदीजा खानम को तोहफे के रूप में यह मस्जिद बनवाई थी।

लक्ष्मी-नारायण मंदिर, बरेली

उत्तर प्रदेश का बरेली अमन और आपसी भाईचारे का शहर है। इसे नाथ नगरी और बरेली शरीफ भी कहा जाता है। यहां सभी धर्मों के पवित्र स्थल हैं। इस शहर की पहचान विश्व पटल पर है। सूफी बुजुर्ग आला हजरत दरगाह दुनियाभर में मशहूर है. यहां पवित्र सात नाथ मंदिर हैं। इन्हीं में एक लक्ष्मी-नारायण मंदिर भी है। शहर के कटरा मानराय में स्थित यह मंदिर हिंदू-मुस्लिम एकता की निशानी है। इसे बनाने के लिए शहर के रईस फजरुल रहमान उर्फ चुन्नू मियां ने अपनी जमीन, पैसा के साथ श्रमदान भी किया।  

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