Jagannath Temple Mysteries: ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर देश के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है। यह चार धाम यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर साल निकलने वाली विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान विष्णु के निर्देश पर कराया था। कहा जाता है कि राजा इंद्रद्युम्न को एक दिन नदी में स्नान करते समय लोहे की एक छड़ मिली थी। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने इसे अपना दिव्य हृदय बताया था। राजा ने उस छड़ को भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा में स्थापित कर दिया और उसे हमेशा गुप्त रखा।
अनोखे रहस्यों के लिए भी प्रसिद्ध है मंदिर
जगन्नाथ मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ कई अनोखे रहस्यों के लिए भी प्रसिद्ध है। इन रहस्यों का आज तक कोई स्पष्ट वैज्ञानिक जवाब नहीं मिल पाया है। मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज हमेशा हवा की दिशा के विपरीत लहराता हुआ दिखाई देता है। यह दृश्य लोगों को हैरान कर देता है। वहीं मंदिर के ऊपर लगा विशाल सुदर्शन चक्र भी एक अनोखा रहस्य माना जाता है। करीब 20 फीट ऊंचा और लगभग एक टन वजनी यह चक्र पुरी शहर के किसी भी कोने से देखने पर ऐसा लगता है जैसे वह देखने वाले की ओर ही मुख किए हुए है।
समुद्र की लहरों की आवाज का रहश्य
एक और हैरानी की बात यह है कि मंदिर के ऊपर पक्षी या विमान उड़ते हुए नहीं दिखाई देते। इसे लेकर कई तरह की धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। वहीं कहा जाता है कि मंदिर की विशाल संरचना दिन के किसी भी समय जमीन पर स्पष्ट छाया नहीं डालती। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार सिंहद्वार पर खड़े होने पर समुद्र की लहरों की आवाज साफ सुनाई देती है। लेकिन जैसे ही श्रद्धालु मंदिर के अंदर प्रवेश करते हैं, समुद्र की आवाज पूरी तरह बंद हो जाती है। बाहर निकलते ही यह आवाज फिर सुनाई देने लगती है।
हवा का उल्टा अनुभव
पुरी में हवा की दिशा भी सामान्य नियमों से अलग मानी जाती है। आमतौर पर दिन में हवा समुद्र से जमीन की ओर चलती है, लेकिन पुरी में कई बार इसका उल्टा अनुभव होता है। मंदिर की एक और परंपरा बेहद खास है। हर दिन एक पुजारी लगभग 45 मंजिला ऊंचे शिखर पर चढ़कर मंदिर का ध्वज बदलता है। मान्यता है कि यदि किसी दिन यह परंपरा टूट जाए तो मंदिर 18 वर्षों तक बंद रह सकता है।
महाप्रसाद अपने आप में अनोखा
जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद भी अपने आप में अनोखा है। यहां रोज हजारों श्रद्धालुओं के लिए एक जैसी मात्रा में प्रसाद बनाया जाता है, लेकिन न तो कभी प्रसाद कम पड़ता है और न ही बचता है। इसके अलावा सात मिट्टी के बर्तनों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर लकड़ी की आग पर खाना पकाया जाता है। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि सबसे ऊपर रखा बर्तन पहले पकता है और उसके बाद नीचे के बर्तनों का भोजन तैयार होता है। इन्हीं अनोखी परंपराओं और रहस्यों की वजह से पुरी का जगन्नाथ मंदिर आज भी आस्था और कौतूहल का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
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