NDA Pass Women: भारतीय सेना और देश की महिलाओं के लिए आज का दिन ऐतिहासिक और गर्व से भरा रहा। पहली बार राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली 14 महिला कैडेट्स भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना में अधिकारी के रूप में शामिल हुई हैं। एक साल की कठिन ट्रेनिंग पूरी करने के बाद इन बेटियों ने देश की रक्षा सेवाओं में नया इतिहास रच दिया है। देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA) और हैदराबाद के डुंडीगल स्थित एयर फोर्स अकादमी में आयोजित पासिंग आउट परेड के बाद इन महिला कैडेट्स को औपचारिक रूप से कमीशन दिया गया। इनमें से 9 महिला कैडेट्स भारतीय थलसेना में अधिकारी बनी हैं, जबकि 5 महिला कैडेट्स भारतीय वायुसेना में अधिकारी के रूप में शामिल हुई हैं।
क्यों खास है उपलब्धि?
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि कुछ साल पहले तक NDA में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति नहीं थी। वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद महिलाओं के लिए NDA के दरवाजे खुले थे। इसके बाद चयनित पहली महिला कैडेट्स ने प्रशिक्षण पूरा कर अब अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया है। इस अवसर पर देहरादून और हैदराबाद में भव्य समारोह आयोजित किए गए। देहरादून के IMA में आयोजित पासिंग आउट परेड में भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने परेड की सलामी ली और प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में Pushkar Singh Dhami भी मौजूद रहे।
16 देशों के 34 विदेशी कैडेट भी शामिल
वहीं हैदराबाद के एयर फोर्स अकादमी में आयोजित समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिस्सा लिया और नए फ्लाइट कैडेट्स को सम्मानित किया। इस बार IMA से कुल 515 कैडेट्स पास आउट हुए हैं। इनमें 16 देशों के 34 विदेशी कैडेट भी शामिल हैं। दूसरी ओर, भारतीय वायुसेना के 217वें कोर्स के तहत 231 फ्लाइट कैडेट्स ने अपनी प्री-कमीशनिंग ट्रेनिंग पूरी की है। इनमें 194 पुरुष और 37 महिला कैडेट शामिल हैं। इन 37 महिला कैडेट्स में NDA के पहले महिला बैच की 5 कैडेट्स भी शामिल हैं।
लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा बनी महिला
दोनों अकादमियों से कुल 746 कैडेट्स अधिकारी बने हैं। NDA की पहली महिला कैडेट्स का यह सफर देश की लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। यह उपलब्धि न केवल महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम भी मानी जा रही है।
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