NEET Solver Gang: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित NEET UG 2026 का री-एग्जाम 21 जून को आयोजित किया गया था। जो कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। लेकिन इस बीच बिहार पुलिस की स्पेशल टीम ने बड़े स्तर पर सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश किया। इस रैकेट में 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कंपनी के 14 कर्मचारी भी शामिल हैं। दरअसल, यह गिरोह परीक्षा में प्रॉक्सी उम्मीदवार (सॉल्वर) यानी असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा देने के लिए भेजता है। इसके लिए गैंग छात्रों से लाखों रुपये तक वसूल लेता है।
कैसे काम करता था गैंग?
बता दें, ये गैंग MBBS छात्रों और अन्य युवाओं को सॉल्वर के रूप में भर्ती करता था। जो परीक्षा केंद्र पर असली उम्मीदवार की जगह परीक्षा देते थे। इसके लिए असली उम्मीदवारों के बायोमेट्रिक डिटेल के साथ छेड़छाड़ की जाती हैं। गैंग बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारियों के साथ मिलकर असली उम्मीदवारों के फिंगरप्रिंट और फोटो की जगह सॉल्वर का नाम जोड़ देता था। इस दौरान लाखों रुपये का लेन-देन किया जाता है। बताया जा रहा है कि गैंग का नेटवर्क देश के अलग-अलग हिस्सों तक फैला हुआ है।
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कैसे हुआ इस गैंग का भंडाफोड़?
इस मामले में पुलिस ने बताया कि यह गैंग मुख्य रूप से नालंदा, मुजफ्फरपुर, लखीसराय और पटना समेत कई जिलों में सक्रिय था। लेकिन गिरोह का खुलासा तब हुआ, जब हाजीपुर निवासी और पीएमसीएच का छात्र मयंक कश्यप संदिग्ध गतिविधियों के दौरान पकड़ा गया। जांच करने पर पता चला कि परीक्षा वाले दिन मयंक बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी के रूप में एग्जाम सेंटर में घुसा, ताकि गैंग के सॉल्वर का बायोमेट्रिक कर वह उसे सुरक्षित कर सकें।
लेकिन प्रशासन को उसकी गतिविधियां आसामान्य लगी, जिसके बाद पूछताछ करने पर सारा सच सामने आया। आरोपी मयंक से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी की। इस दौरान कई सॉल्वर और बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई
छानबीन करने पर इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड का नाम भी सामने आया। इस मामले में मेडिकल कॉलेज का छात्र अर्पित राज का नाम सामने आया। लेकिन यह पहली बार नहीं था, जब पुलिस को उस पर शक हुआ। साल 2024 के NEET पेपर लीक मामले में भी उससे पूछताछ की गई थी।