El Nino Effect: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने 4 जून को केरल में दस्तक दी थी और अबतक 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक पहुंच गया है। इसके बावजूद इस साल मॉनसून की शुरुआत जून में काफी सूखी रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, 4 से 18 जून के बीच पूरे देश में 46% की कमी दर्ज की गई है। इस अवधि में 46 mm बारिश हुई, जबकि सामान्य 84.4mm होती है। फिलहाल मॉनसून की प्रगति दक्षिणी महाराष्ट्र में रुकी हुई है, जिससे आगे बढ़ने में देरी हो रही है।
अल नीनो का प्रभाव से क्या होगा?
मौसम विभाग ने बताया कि इस सूखी शुरुआत का बड़ा कारण अल नीनो है। प्रशांत महासागर में मजबूत अल नीनो की स्थिति विकसित हो रही है, जो धीरे-धीरे भारत के मॉनसून को कमजोर कर रहा है। बता दें, अल-नीनो की स्थिति तब पैदा होती है जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में सतही पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जो नमी लाने वाली हवाएं की कमजोरी का कारण बनते हैं, जिससे भारत में बारिश कम हो जाती है।
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मालूम हो कि IMD ने पहले ही चेतावनी दे दी है कि इस साल मॉनसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। साथ ही, जून से सितंबर तक पूरे देश में मॉनसून की बारिश सामान्य से कम (90 प्रतिशत LPA) रहने की 60 प्रतिशत संभावना है। इसका सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा, खरीफ फसलों की बुआई को प्रभावित करेगा। सबसे बड़ा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इसके अलावा जलाशयों में पानी का स्तर कम होने से पानी की समस्या भी हो सकती है। इसका असर मुंबई समेत कई शहरों में देखने को मिल रहा है।
IMD के ताजा अपडेट की मानें तो 23 जून के आसपास मॉनसून महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। जुलाई के पहले हफ्ते में मॉनसून उत्तर भारत में भी दस्तक दे सकता है।