Haryana Water Conservation Project: हरियाणा सरकार किसानों की परेशानी को जड़ से उखाड़ने के लिए एक बड़ी योजना लेकर आई है। जिसके तहत 2 लाख एकड़ जलभराव वाली बंजर जमीन को अब उपजाऊ बनाया जाएगा। इसके लिए वर्ल्ड बैंक ने हरियाणा की 'जल संरक्षित हरियाणा' परियोजना के लिए 4,000 करोड़ रुपये का लोन को भी मंजूरी दे दी है। वैसे तो परियोजना की कुल लागत 5,714 करोड़ रुपये है, जिसमें राज्य सरकार 1,714 करोड़ रुपये का योगदान देगी। ये परियोजना राज्य को जल-आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो 2026 से 2032 तक कई चरणों में लागू होगी।
बंजर जमीन बनेगी खेती के लायक
दरअसल, हरियाणा में जलभराव एक बड़ी समस्या के रूप में उभर रहा है। जो किसानों को प्रभावित करता है और खेतों में पानी भर जाता है या फिर सिंचाई के समय नहरें सूख जाती है। जिस वजह से करीब 2 लाख एकड़ जमीन लंबे समय से बंजर या बेकार पड़ी है। इसलिए राज्य सरकार ने बेकार पड़ी जमीन को दोबारा खेती के लायक बनाने के लिए 'जल संरक्षित हरियाणा' परियोजना की शुरुआत की। इससे किसानों को राहत मिलेगी, अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी और भूजल स्तर में सुधार होगा और उत्पादन में जबरदस्त उछाल आने से किसानों को ही फायदा होगा।
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इन 7 जिलों को मिलेगा बड़ा फायदा
इस परियोजना के तहत सभी नहरों और सिंचाई व्यवस्था को सुतारू रूप से चालू किया जाएगा। लेकिन इसी के साथ सरकार उन 7 जिलों पर भी ध्यान देगी, जहां भू-जल स्तर बहुत तेजी से नीचे गया है। इन जिलों में भिवानी, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी और सिरसा का नाम शामिल हैं। इन जिलों के लिए सरकार ने एक बड़ा प्लान तैयार किया है।
इसके लिए बारिश के स्टोरेज और भूजल रिचार्ज के लिए 147 नए तालाबों और जल निकायों का निर्माण होगा। इसके अलावा 1.12 लाख एकड़ में फसल विविधीकरण किया जाएगा। पानी की कम खपत वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। 5 लाख एकड़ में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इससे धान की खेती में पानी की बचत होगी। पानी की उपलब्धता और उपयोग की रीयल-टाइम निगरानी की जाएगी। जींद, कैथल और गुरुग्राम (धनवापुर) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स से साफ पानी को 28,000 एकड़ में सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।