
RSS Chief Mohan Bhagwat:आएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए फिर से यूसीसी, जनसंख्या और तीन बच्चे पैदा करने वाले विषय पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि देश में अब कटने और बंटने के दिन खत्म हो चुके हैं। सन् 1947 की विभाजन जैसी त्रासदी अब फिर से नहीं दोहराई जाएगी।
मोहन भागवत ने कहा कि विभाजन के दुष्परिणाम सामने आ चुके हैं। अब समाज और राष्ट्र दोनों जाग चुका है। उन्होंने यह विचार संघ यात्रा नए क्षितिज, नए आयाम विषयक प्रमुख जन गोष्ठी में दिए हैं। अब पूरा विश्व भारत में फिर से नेतृत्व की भूमिका देख रहा है।
तीन बच्चे और यूसीसी का समर्थन
मोहन भागवत ने जनसंख्या कानून की जरूरत पर जोर देते हुए सरसंघ चालक ने तीन बच्चों की जरूरत को समर्थन किया। उन्होंने उत्तराखंड में लागू हुए समान नागरिक संहित की पहल को सराहा और इसे समाज को जोड़ने वाला करार दिया। उन्होंने कहा यूसीसी पूरे देश में लागू होना चाहिए। देश में आरक्षण बराबरी के लिए लाया गया था, जब तक सामाजिक विषमता का व्यवहार मन में रहेगा तक अदृश्य चलती रहेगी। मोहन भागवत ने कहा कि जब तक मन से भेदभाव नहीं निलके, तब तक आरक्षण लागू रहना चाहिए, हजारो वर्षों की इस समस्या को हल कानून से नहीं सामाजि ताने-बाने से निकलेगा।
महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण
मोहन भागवत ने महिलाओं के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आधी आबादी को 33 फीसदी नहीं बल्कि 50 फीसदी आरक्षण देना चाहिए। शिक्षा नीति में भविष्य में आवश्यक परिवर्तन की संभावना व्यक्त करते हुए इसे राष्ट्रनिर्माणा का आधार बताया। मोहन भागवत ने कहा कि लिव इन जैसे संबंध भारतीय समाज में स्वीकार नहीं है। विवाह बगैर उपभोग तो सिर्फ जानवरों में होता है। उन्होंने भ्रष्टाचार को मन का संस्कार बताकर कहा कि शासन-प्रशासन में आचरण आवश्यक है। नई पीढ़ी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जेन-जी के समक्ष दंभ नहीं, प्रामाणिकता से पेश आना होगा।
Leave a comment