"शिक्षा कोई व्यवसाय नहीं...", मोहन भागवत ने मौजूदा एजुकेशन पॉलिसी पर उठाए सवाल

Mohan Bhagwat Remarks On Education Policy: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पहले उन्होंने मंदिर-मस्जिद विवाद पर बयान दिया था। जिसके बाद विपक्षी दलों ने दोनों हाथों से उनके बयान को लपका था।

मोहन भागवत ने अब शिक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा प्रणाली को सीखने में बाधा नहीं बल्कि सुविधा प्रदान करने के तौर पर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिस्टम को बदलते समय के साथ तालमेल बिठाते हुए बुनियादी मूल्यों में निहित रहना भी जरूरी है।

शिक्षा कोई व्यवसाय नहीं

मोहन भागवत ने बानेर में लोकसेवा ई स्कूल के उद्घाटन करने के दौरान कहा कि शिक्षा कोई व्यवसाय नहीं है बल्कि अच्छे इंसान बनाने का एक व्रत है। उन्होंने कहा कि हमें आधुनिक और प्राचीन सभयता को एक साथ रखने की जरूरत है, जिसके लिए सभी को योगदान देना चाहिए। शिक्षा को एक ढांचे तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समग्र होना चाहिए जिसे पूरे समाज को लाभ मिले। मोहन भागवत ने आगे कहा कि शिक्षा प्रणाली को केवल नियामक के रूप में काम करने के बजाय छात्रों को सशक्त बनाने के साधन के रूप में उपयोग करना चाहिए।

मंदिर-मस्जिद को लेकर दिया था बयान

बता दें कि मोहन भागवत ने मंदिर-मस्जिद विवादों के फिर से उठने पर गहरी चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद कुछ लोग ऐसे मुद्दों को उछालकर खुद को 'हिंदुओं के नेता' साबित करना चाहते हैं। हालांकि, भागवत ने यह बयान किसी का नाम लिए बगैर दिया था। गुरुवार यानी 19 दिसंबर को सहजीवन व्याख्यानमाला में ‘भारत-विश्वगुरु’ विषय पर व्याख्यान देते हुए आरएसएस प्रमुख ने समावेशी समाज की वकालत की और कहा कि दुनिया को यह दिखाने की जरूरत है, कि देश सद्भावना के साथ एक साथ रह सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि 'केवल हम ही ऐसा कर सकते हैं।

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