'भारत में रहने वाले ईसाई और मुस्लिम हिन्दू है', क्रिसमस डे के मौके पर धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान

'भारत में रहने वाले ईसाई और मुस्लिम हिन्दू है', क्रिसमस डे के मौके पर धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान

Dhirendra Shastri Statement On Christmas: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अक्सर अपने विवादित बयानों की वजह से चर्चा में रहते हैं। ऐसे में आज जहां लोग क्रिसमस डे मना रहे है, तो वहीं दूसरी तरफ पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने क्रिसमस डे से एक दिन पहले ईसाईयों को लेकर बड़ा बयान दिया है। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि इस देश में रहने वाले प्रत्येक ईसाई हिन्दू है। क्योंकि यह देश हिंदुस्तान हे और मुसलमान और ईसाई की आठवीं और नवमी पीढ़ी हिंदू है। 

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि ईसाई की आठवीं पीढ़ी रामलाल और नवमी पीढ़ी श्यामलाल हैं। सब सनातनी हैं, कोई पराया नहीं है। धीरेंद्र शास्त्री आगे कहते है कि हमने प्रण कर लिया, जब तक जीएंगे, हम नहीं सुधरेंगे। हम हिन्दू राष्ट्र बनाकर ही मानेंगे। हमने तो अपनी जिम्मेदारी निभाया। अब तुम्हारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हम हिंदू राष्ट्र बनाकर ही मानेंगे। आपको अपनी बहन बेटियों को सुरक्षित रखना होगा तो हिंदू राष्ट्र बनाना होगा।

पहले भी दे चुके है विवादित बयान

बता दें, मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में मंगलवार को बागेश्वर सरकार ने भक्तों को आर्शीवचन सुनाया। लेकिन इससे पहले भी धीरेंद्र शास्त्री ऐसा बयान दे चुके हैं। दरअसल, शिवपुरी के करैरा में हो रही कथा में बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बड़ा बयान दिया था। इस कथा में उन्होंने हिंदुओं को चार बच्चे पैदा करने की सलाह दी थी। जिसके बाद उनका यह बयान चर्चा में आ गया था।

भागवत कथा के दौरान दिया था विवादित बयान

दरअसल शिवपुरी के करैरा में हो रही भागवत के दौरान बाबा ने कहा था 'देश में हिंदुओं की संख्या कम हो रही है, यह चिंताजनक है। घटती हुई हिंदुओं की आबादी और गजवा ए हिंद चाहने वाले लोगों की बढ़ती हुई आबादी इस देश के लिए घातक है। ऐसे में हिंदुओं को एक बच्चे की जगह चार बच्चे पैदा करना जरूरी है, क्योंकि यह देश के लिए जरूरी है।' 

उन्होने कहा था कि तीन से लेकर चार बच्चे होना इस वजह से जरूरी है। क्योंकि इससे परिवारों का विखंडन हो रहा है। कम बच्चे होने की वजह से आज रिश्ते खत्म होते जा रहे हैं। एक दो बच्चे होने में कौन चाचा कहेगा, कौन मामा कहेगा और कौन काका कहेगा। यह सब खत्म होता जा रहा है। कम बच्चे होने से रिश्तो का सुख खत्म होता जा रहा है।  

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