
Chinmoy Krishna Das Bail Petition Rejected: बांग्लादेश की कोर्ट से हिंदू आध्यात्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास को झटका लगा है। चटगांव कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। अब उनके वकील हाई कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। चिन्मय कृष्ण दास को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया था। कोर्ट में इस मामले को लेकर 30 मिनिट तक सुनवाई हुई। जिसमें कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना।
इससे पहले 11 दिसंबर को एक बांग्लादेश की एक अदालत ने दास की प्रारंभिक जमानत याचिका को प्रक्रिया में खामी के कारण खारिज कर दिया था। बता दें, पुलिस ने चिन्मय कृष्ण दास को देशद्रोह के आरोप में 25 नवंबर 2024 को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद बांग्लादेश के साथ-साथ दुनिया के अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन शुरू हो गए थे।
42 दिन बाद भी सुनवाई में जमानत खारिज
कोलकाता इस्कॉन के वीपी राधा रमन ने कहा कि यह बेहद दुखद खबर है। हम जानते हैं कि पूरी दुनिया की नजर इस पर थी. सभी को उम्मीद थी कि नए साल में चिन्मय प्रभु को आजादी मिल जाएगी। लेकिन 42 दिन बाद भी आज सुनवाई में उनकी जमानत खारिज कर दी गई। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसे न्याय मिले।
चिन्मय कृष्ण दास के वकील ने क्या कहा?
चिन्मय कृष्ण दास के वकील अपूर्व कुमार ने कहा कि हम एन्जीबी ओक्या परिषद के बैनर तले चटगांव आए हैं। उन्होंने कहा 'मैं सुप्रीम कोर्ट और चटगांव बार एसोसिएशन का सदस्य हूं। ऐसें में मुझे केस को आगे बढ़ाने के लिए किसी स्थानीय वकील की मुहर की जरूरत नहीं है।' इससे पहले 3 दिसंबर 2024 को चटगांव कोर्ट ने जमानत पर सुनवाई के लिए 2 जनवरी 2025 की तारीख तय की थी।
बता दें, चिन्मय दास के वकील की तबीयत खराब होने के कारण उनकी जमानत याचिका पर 11 वकीलों ने सुनवाई में भाग लिया। कोर्ट में वकीलों की तरफ से कहा गया कि चिन्मय दास को कई गंभीर बीमारियां हैं। लेकिन इसके बाद भी उन्हें गलत तरीके से जेल में रखा गया है।
क्या हैं चिन्मय दास पर लगे आरोप?
हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर को ढाका के हजरत शाहजलाल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। उन पर बांग्लादेश के झंडे का कथित रूप से अपमान करने के लिए देशद्रोह का आरोप लगाया गया है। बांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी का लगातार विरोध किया जा रहा है।
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (BHBCOP) ने 29 दिसंबर 2024 को चिन्मय दास के खिलाफ दर्ज किए गए मामले को झूठा बताया। उन्होंने कहा कि उत्पीड़न के उद्देश्य से चिन्मय दास की गिरफ्तारी की गई।
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