Heavy Rain: दिल्ली से सटे गुरुग्राम में मानसून की पहली तेज बारिश ने शहर की व्यवस्था की पोल खोल दी। कुछ घंटों की बारिश के बाद कई सड़कें जलमग्न हो गईं, वाहन पानी में फंस गए और दिल्ली-जयपुर हाईवे (NH-48) का एक हिस्सा धंस गया। हालात ऐसे बन गए कि लोगों ने गुरुग्राम की तुलना मुंबई से करनी शुरू कर दी, जहां हर साल बारिश के दौरान जलभराव बड़ी समस्या बन जाता है।
इन इलाकों में हुआ जलभराव
भारी बारिश के कारण हीरो होंडा चौक, राजीव चौक, नरसिंहपुर और कई निचले इलाकों में पानी भर गया। सड़कों पर घुटनों तक पानी जमा होने से वाहनों की रफ्तार थम गई और कई जगह लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। ऑफिस जाने और लौटने वाले लोगों को घंटों तक जाम में फंसे रहना पड़ा। सबसे ज्यादा असर दिल्ली-जयपुर हाईवे (NH-48) पर देखने को मिला, जहां नरसिंहपुर के पास सड़क का एक हिस्सा धंस गया। इसके चलते दिल्ली और जयपुर की ओर जाने वाले मार्ग पर करीब 8 से 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। प्रशासन ने प्रभावित हिस्से की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है।
स्कूल बस भी हादसे का शिकार
बारिश के दौरान एक स्कूल बस भी NH-48 पर हादसे का शिकार हो गई। राहत की बात यह रही कि उस समय बस में कोई बच्चा सवार नहीं था, इसलिए कोई जनहानि नहीं हुई। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गुरुग्राम में जलभराव की समस्या क्यों नहीं खत्म हो रही है। लोगों का कहना है कि खराब ड्रेनेज सिस्टम, जाम नालियां और समय पर सफाई नहीं होने के कारण हर बारिश में शहर की यही तस्वीर सामने आती है।
क्या कहता है IMD?
इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुरुग्राम में 8 जुलाई को भी बारिश का अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश की संभावना को देखते हुए कई निजी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने की सलाह दी है, ताकि लोगों को ट्रैफिक और जलभराव की परेशानी से बचाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुग्राम को भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचाने के लिए मजबूत ड्रेनेज सिस्टम, नालों की नियमित सफाई और बेहतर शहरी योजना की जरूरत है। जब तक इन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जाएगा, तब तक हर मानसून में लोगों को इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
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